RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक (RBI MPC Meeting) के नतीजों का ऐलान आज यानी 5 अगस्त (बुधवार) को होने जा रहा है। दिसंबर 2025 में रेपो रेट में आखिरी बार बदलाव किया गया था, जिसके बाद से लगातार तीन पॉलिसियों में ब्याज दरें जस की तस बनी हुई हैं।
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विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए केंद्रीय बैंक लगातार चौथी बार रेपो रेट में कोई बदलाव न करते हुए इसे 5.25% पर ही बरकरार रख सकता है।
सुबह 10 बजे होगा नीतिगत दरों का ऐलान
सोमवार (3 अगस्त) से शुरू हुई MPC बैठक का फैसला RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा सुबह 10:00 बजे सुनाएंगे। इसके बाद दोपहर 12:00 बजे गवर्नर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर मीडिया के सवालों के जवाब देंगे। इस पूरे कार्यक्रम का लाइव प्रसारण रिजर्व बैंक के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा।
मौजूदा आर्थिक दरें (Current Rates):
- रेपो रेट (Repo Rate): 5.25%
- एसडीएफ रेट (SDF Rate): 5.00%
- एमएसएफ रेट (MSF Rate): 5.50%
- बैंक रेट (Bank Rate): 5.50%
वैश्विक अनिश्चितता और महंगाई के बीच संतुलन
जून में हुई पिछली बैठक में RBI ने ‘न्यूट्रल’ (तटस्थ) रुख अपनाते हुए दरों को यथावत रखा था। पश्चिम एशिया में तनाव, सप्लाई चेन में रुकावटों और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव का जिक्र करते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सतर्क रहने के संकेत दिए थे।
कंज्यूमर महंगाई में हालिया तेजी के बावजूद दरें न बढ़ाने का मुख्य कारण यह है कि महंगाई अभी भी RBI के तय दायरे के भीतर है। चालू वित्त वर्ष के लिए औसतन महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान लगाया गया है।
विशेषज्ञों की राय: दरों से ज्यादा ‘गवर्नर के बयान’ पर रहेगी बाजार की नजर
1. लिक्विडिटी और भविष्य के संकेतों पर फोकस:
INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दसानी का कहना है कि रेपो रेट में किसी बदलाव की गुंजाइश कम है। अब बाजार का ध्यान रेट कट से हटकर महंगाई और लिक्विडिटी पर दिए जाने वाले गाइडेंस पर टिक गया है। यदि RBI विकास दर (Growth) को प्रभावित किए बिना महंगाई नियंत्रित करने का भरोसा देता है, तो इससे वित्तीय बाजारों को बल मिलेगा।
2. घरेलू परिस्थितियों को मिलेगी प्राथमिकता:
SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज की सीनियर रिसर्च एनालिस्ट सीमा श्रीवास्तव के अनुसार, RBI वैश्विक दबाव के बजाय घरेलू आर्थिक स्थितियों को प्राथमिकता देगा। केंद्रीय बैंक ‘न्यूट्रल’ रुख जारी रखते हुए मैक्रो-इकोनॉमिक डेटा का इंतजार कर सकता है। हालांकि, यदि भविष्य में महंगाई का जोखिम बढ़ता है, तो वित्त वर्ष 2027 में आगे चलकर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। (RBI MPC Meeting)



