रायपुर : आरक्षण के विषय पर सोशल मीडिया पर की गई एक बेहद विवादित और आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग की सहयोगी संस्था ‘छत्तीसगढ़ संवाद’ ने कड़ा रुख अपनाया है। संस्था ने अपने वरिष्ठ संपादकीय सलाहकार डॉ. अनिल द्विवेदी की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं।
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जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, डॉ. अनिल द्विवेदी प्लेसमेंट एजेंसी ‘प्राइमवन वर्कफोर्स’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ संवाद में वरिष्ठ संपादकीय सलाहकार के पद पर कार्यरत थे।
शासकीय नीति-निर्देशों और निविदा की शर्तों का उल्लंघन
छत्तीसगढ़ संवाद द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि डॉ. द्विवेदी द्वारा सार्वजनिक मंच (सोशल मीडिया) पर की गई टिप्पणी एक शासकीय पत्रिका के वरिष्ठ संपादकीय सलाहकार पद की गरिमा, मानकों और शासकीय नीति-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। इसके साथ ही, उनका यह कृत्य प्लेसमेंट एजेंसी के साथ हुई निविदा की शर्तों के भी विपरीत पाया गया। इसी आधार पर उनकी सेवाएं तत्काल समाप्त करते हुए एजेंसी को उन्हें वापस लेने का निर्देश दिया गया है।
क्या था विवादित पोस्ट?
डॉ. अनिल द्विवेदी ने अपने व्यक्तिगत फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें उन्होंने लिखा था:
“शिक्षा शेरनी का दूध है लेकिन… आरक्षण कुतिया का वो दूध है जिसे पीकर 33% वाला 90% वाले पर भौंकता है।”
इस विवादित पोस्ट के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। विभिन्न सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने इसे आरक्षण तथा आरक्षित वर्ग का गंभीर अपमान बताते हुए डॉ. द्विवेदी पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने सरकार को घेरा था
इस मामले ने तूल तब पकड़ लिया जब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री के अधीन आने वाले विभाग के एक अधिकारी की ऐसी भाषा आरक्षित वर्ग का सीधा अपमान है। उन्होंने इस विषय पर मुख्यमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग की थी।



