जगदलपुर। बस्तर जिले में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि बैंक ने एक किसान की पैतृक जमीन को आधार बनाकर दूसरी महिला के नाम किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण स्वीकृत कर दिया। अब उस ऋण की एंट्री राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होने से वास्तविक भू-स्वामियों को न तो नया कृषि ऋण मिल पा रहा है और न ही वे सरकार की किसान कल्याण योजनाओं का लाभ उठा पा रहे हैं।
मामला बस्तर जिले की नानगुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़ेमुरमा का है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि बैंक की कथित लापरवाही और प्रशासनिक त्रुटि के कारण उनकी वर्षों पुरानी पैतृक भूमि विवादों में उलझ गई है। इस संबंध में उन्होंने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई और राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त कराने की मांग की है।
कोर्ट के फैसले के बावजूद नहीं मिला राहत
पीड़ित परिवार के सदस्य जानकी बाई, तुलावती, सत्यनारायण और बलराम, स्वर्गीय शीतल राम के उत्तराधिकारी हैं। उनके नाम ग्राम छोटे मुरमा स्थित खसरा नंबर 128, 174, 176 और 221 में कुल 4.68 हेक्टेयर भूमि संयुक्त रूप से दर्ज है। परिवार का कहना है कि इस जमीन से जुड़े विवाद में न्यायालय पहले ही उनके पक्ष में फैसला दे चुका है, लेकिन इसके बावजूद रिकॉर्ड में दर्ज कथित त्रुटियां दूर नहीं की गईं।

दूसरी महिला के नाम स्वीकृत हुआ कृषि ऋण
परिवार का आरोप है कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, जगदलपुर ने इसी भूमि को बंधक मानते हुए सुलोचना पिता झितरू, निवासी छोटे मुरमा, के नाम वर्ष 2025-26 में 1.23 लाख रुपये से अधिक का किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण स्वीकृत कर दिया। उनका कहना है कि यह ऋण अन्य सह-भू-स्वामियों की जानकारी या सहमति के बिना दिया गया। वर्तमान में यह ऋण बकाया श्रेणी में पहुंच चुका है।

वास्तविक किसानों को नहीं मिल रहा ऋण
राजस्व रिकॉर्ड में उक्त ऋण दर्ज होने के कारण वास्तविक भू-स्वामी बलराम को नया कृषि ऋण नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा किसान सम्मान निधि सहित अन्य कृषि योजनाओं का लाभ लेने में भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परिवार का कहना है कि उनकी जमीन पर किसी अन्य व्यक्ति का कर्ज दर्ज होने से वे आर्थिक और प्रशासनिक दोनों तरह की मुश्किलों में फंस गए हैं।
बैंक ने क्या कहा?
दूसरी ओर, संबंधित समिति का कहना है कि तहसीलदार जगदलपुर के 22 जून 2021 के एक आदेश के आधार पर संबंधित भूमि का कब्जा सुलोचना को सौंपा गया था। इसी आधार पर ऋण स्वीकृत किया गया। समिति का यह भी कहना है कि ऋण की वसूली के लिए संबंधित उधारकर्ता को नोटिस जारी किया जा चुका है।
कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार
पीड़ित परिवार ने 10 जुलाई को बस्तर कलेक्टर को लिखित आवेदन सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, राजस्व रिकॉर्ड से कथित अवैध ऋण की प्रविष्टि हटाने, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने तथा उन्हें नया कृषि ऋण और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की है। आवेदन की प्रतियां नानगुर तहसील और संबंधित बैंक शाखा को भी भेजी गई हैं।
पीड़ितों का कहना है कि जब न्यायालय उनके पक्ष में फैसला दे चुका है, तब उनकी सहमति के बिना उनकी जमीन पर किसी अन्य व्यक्ति के नाम ऋण स्वीकृत कैसे किया गया। उनका आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया ने उनके परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिया है। फिलहाल वे प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्यायपूर्ण कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं।



