रायपुर। राजधानी के चर्चित नव्या मलिक एमडीएमए ड्रग्स प्रकरण की जांच अब विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दी गई है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर गठित पांच सदस्यीय एसआईटी इस हाईप्रोफाइल मामले के हर पहलू की नए सिरे से पड़ताल करेगी। जांच का दायरा केवल ड्रग्स की बरामदगी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे ड्रग सिंडिकेट, अंतरराज्यीय नेटवर्क, मनी ट्रेल और कथित हाईप्रोफाइल कनेक्शनों की भी विस्तृत जांच की जाएगी।
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एसआईटी में एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी), क्राइम ब्रांच प्रभारी, गंज थाना प्रभारी समेत पांच अधिकारी शामिल किए गए हैं। टीम को डिजिटल साक्ष्यों, आर्थिक लेन-देन और ड्रग्स सप्लाई चेन की गहराई से जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यह मामला 23 अगस्त 2025 को उस समय सामने आया था, जब एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और गंज थाना पुलिस ने देवेंद्र नगर ओवरब्रिज के पास एक कार से 27.58 ग्राम एमडीएमए ड्रग्स बरामद की थी। कार्रवाई के दौरान रायपुर निवासी हर्ष आहूजा, हरियाणा के हिसार निवासी मोनू विश्नोई और रायपुर निवासी दीप धनोरिया को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उनके कब्जे से एमडीएमए, एक कार, 85,300 रुपये नकद और पांच मोबाइल फोन जब्त किए थे। जब्त सामग्री की कुल कीमत करीब 20 लाख रुपये आंकी गई थी। इस मामले में एनडीपीएस एक्ट की धारा 21(सी) और 29 के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
प्रारंभिक पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने बाद में मुंबई से नव्या मलिक को भी गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह रायपुर में आयोजित निजी पार्टियों, नाइट क्लबों और हाईप्रोफाइल आयोजनों में एमडीएमए की सप्लाई करती थी तथा कई आयोजनों में स्वयं मौजूद रहकर ड्रग्स उपलब्ध कराती थी।
पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, पूरा नेटवर्क मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए संचालित किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों के माध्यम से कई लोगों तक एमडीएमए पहुंचाई गई थी। चार्जशीट में कुछ कथित ग्राहकों और भुगतान से जुड़े लोगों का भी उल्लेख किया गया है, जिनकी भूमिका की आगे जांच की जाएगी।
एसआईटी ने जांच को दो चरणों में आगे बढ़ाने की योजना बनाई है। पहले चरण में ड्रग्स के मूल स्रोत, सप्लाई नेटवर्क, आरोपियों की भूमिका, आर्थिक लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाएगी। वहीं दूसरे चरण में अंतरराज्यीय कनेक्शन, कथित संरक्षण देने वाले लोगों, हाईप्रोफाइल पार्टियों में ड्रग्स की आपूर्ति, डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण तथा ड्रग्स खरीदने वाले अन्य लोगों की पहचान पर विशेष फोकस रहेगा।
जांच एजेंसी बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजेक्शन, नकद भुगतान, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का भी फॉरेंसिक परीक्षण करेगी, ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें।
इधर, इस मामले से जुड़े कथित अवैध धन और मनी ट्रेल की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी अलग से कर रहा है। ऐसे में यह मामला अब केवल ड्रग्स बरामदगी का नहीं, बल्कि संगठित अपराध, आर्थिक लेन-देन और अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच का भी महत्वपूर्ण प्रकरण बन गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एसआईटी की जांच के दौरान नए तथ्य सामने आने पर मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जा सकती है।



