अयोध्या, 01 जुलाई। Ram Mandir Theft Case : राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार तेज होती जा रही है। बुधवार को पुलिस ने आरोपी लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा के घरों पर छापेमारी कर दस्तावेजों की जांच शुरू की। इससे पहले जेल में बंद आरोपी अविनाश शुक्ला के अयोध्या स्थित योग केंद्र से ‘रामराज्य कोष’ लिखी एक संदूक बरामद की गई, जिस पर डिजिटल भुगतान के लिए Paytm QR कोड भी लगा हुआ था।
अविनाश से दो घंटे पूछताछ
मंगलवार को पुलिस ने फैजाबाद जेल में बंद सभी आठ आरोपियों से पूछताछ की। सबसे लंबी पूछताछ अविनाश शुक्ला से हुई। करीब दो घंटे चली पूछताछ में उसके घर से बरामद 14 लाख रुपये नकद और गहनों के संबंध में सवाल किए गए।
SIT को मिला और समय, ED की एंट्री के संकेत
मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को सरकार ने 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया है। सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा बढ़ाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी शामिल किए जाने पर विचार किया जा रहा है। इस संबंध में अयोध्या पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों से अनुरोध किया है।
400 निजी सुरक्षाकर्मी भी जांच के दायरे में
राम मंदिर परिसर में तैनात करीब 400 निजी सुरक्षाकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस ड्यूटी रोस्टर, CCTV फुटेज और एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। जानकारी के मुताबिक, मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा एक निजी सुरक्षा एजेंसी के पास था, जिस पर ट्रस्ट हर महीने लगभग 1 करोड़ रुपये खर्च करता था।
चंपत राय से पूछताछ, RMO का तबादला
राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय से पुलिस पहले ही करीब तीन घंटे पूछताछ कर चुकी है। वहीं, पिछले 17 वर्षों से मंदिर में तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (RMO) अर्जुन देव का गोरखपुर तबादला कर दिया गया है। वे मंदिर परिसर में लगे 1600 CCTV कैमरों की निगरानी व्यवस्था से जुड़े थे और उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में है।
महंत नृत्य गोपाल दास अस्पताल में भर्ती
इसी बीच, राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास महाराज की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल के अनुसार उन्हें सांस लेने में तकलीफ और यूरिन इन्फेक्शन की शिकायत है।
क्या है पूरा मामला?
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT गठित की। 25 जून को FIR दर्ज हुई और 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उसी दिन ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।



