रायपुर। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के संगठनात्मक प्रशिक्षण कार्यक्रम में राहुल गांधी की संभावित मौजूदगी को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा की चुनावी सफलता और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
दरअसल, कांग्रेस द्वारा संगठन सृजन अभियान के तहत नव-नियुक्त जिला और शहर कांग्रेस अध्यक्षों के लिए 21 जून से 30 जून तक रायपुर में 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान राहुल गांधी भी किसी एक दिन प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होकर संगठन को मजबूत बनाने और कार्यकर्ताओं को दिशा देने का काम करेंगे।
राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. रमन सिंह ने कांग्रेस पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जहां भी जाते हैं, वहां कांग्रेस की स्थिति कमजोर होती दिखाई देती है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि राहुल गांधी को छत्तीसगढ़ का दौरा भी करना चाहिए, ताकि प्रदेश कांग्रेस की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
रमन सिंह के इस बयान पर पलटवार करते हुए भूपेश बघेल ने भाजपा की चुनावी जीत के आंकड़ों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं, वहां भाजपा को असाधारण सफलता मिली है, जिसकी निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है। बघेल ने दावा किया कि कई राज्यों में भाजपा का जीत प्रतिशत सामान्य राजनीतिक परिस्थितियों से कहीं अधिक दिखाई देता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती मतदाताओं की स्वतंत्र भागीदारी से होती है और चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची और चुनावी व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका जवाब मिलना चाहिए।
बघेल ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों से ईवीएम से जुड़ी घटनाओं और शिकायतों की खबरें सामने आती रही हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कायम रहे।
इधर कांग्रेस संगठन आगामी प्रशिक्षण शिविर को लेकर तैयारियों में जुट गया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यह कार्यक्रम संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और आगामी चुनावों की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।