रायपुर, 16 जून। High Court Order : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में पुलिस विभाग को कड़ा संदेश देते हुए डीजीपी को 90 दिनों के भीतर लंबित आवेदन पर फैसला लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि किसी भी आवेदन को वर्षों तक लंबित रखना उचित नहीं है और सक्षम प्राधिकारी को तय समयसीमा में निर्णय लेना चाहिए।
आरक्षक की पत्नी की याचिका पर हाईकोर्ट का अहम फैसला
मामला बलौदाबाजार-भाटापारा निवासी सावित्री ठाकुर से जुड़ा है, जिनके पति लोकप्रताप सिंह पुलिस विभाग में आरक्षक थे। वर्ष 2018 में सेवा के दौरान उनके निधन के बाद सावित्री ठाकुर ने जनवरी 2021 में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन विभागीय स्तर पर वर्षों तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।
मामले की सुनवाई करते हुए राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने कहा कि आवेदन पर निर्णय लेना सक्षम प्राधिकारी का अधिकार है, लेकिन उसे अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता।
राज्य शासन ने याचिका का विरोध करते हुए बताया कि मृत आरक्षक की आत्महत्या के मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ दुष्प्रेरण का प्रकरण दर्ज हुआ था, हालांकि ट्रायल कोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना डीजीपी को निर्देश दिया कि उपलब्ध दस्तावेजों और नियमों के आधार पर 90 दिनों के भीतर विधिसम्मत निर्णय लिया जाए।



