दुर्ग। पश्चिम बंगाल के दानकुनी से गुजरात के सूरत तक प्रस्तावित डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridor) परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना जारी कर संबंधित एसडीएम को सक्षम प्राधिकारी नियुक्त किए जाने के बाद अब परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है।
करीब 2100 से 2200 किलोमीटर लंबे इस मालवाहक रेल कॉरिडोर का उद्देश्य देश के प्रमुख औद्योगिक, खनिज और बंदरगाह क्षेत्रों को बेहतर रेल नेटवर्क से जोड़ना है। यह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर गुजरेगा। इस रेलमार्ग पर केवल मालगाड़ियों का संचालन किया जाएगा, जिससे औद्योगिक परिवहन व्यवस्था को गति मिलेगी। (Dedicated Freight Corridor)
दुर्ग जिले के 18 गांव होंगे प्रभावित
दुर्ग जिले में यह कॉरिडोर दुर्ग, पाटन और भिलाई-3 तहसील के कुल 18 गांवों से होकर गुजरेगा। परियोजना को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रभावित गांवों में जमीन से जुड़े लेन-देन पर रोक लगा दी है। फिलहाल इन क्षेत्रों में जमीन की खरीदी-बिक्री, खाता विभाजन, अंतरण और व्यपवर्तन पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है ताकि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया प्रभावित न हो।
दावा-आपत्ति के बाद तय होगा मुआवजा
भूमि अधिग्रहण के अगले चरण में प्रभावित जमीनों का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाएगा। इसके बाद संबंधित भू-स्वामियों को दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। जनसुनवाई पूरी होने के बाद राजस्व विभाग और रेलवे की संयुक्त टीम जमीन, मकान, कुएं, पेड़-पौधों समेत अन्य परिसंपत्तियों का मूल्यांकन करेगी। निर्धारित नियमों के तहत मुआवजा राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में जमा की जाएगी। भुगतान प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही जमीन रेलवे को हस्तांतरित की जाएगी।
औद्योगिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार
इस कॉरिडोर के निर्माण से दुर्ग जिला देश के दो बड़े व्यापारिक केंद्र दानकुनी और सूरत से सीधे जुड़ जाएगा। इससे क्षेत्र के इस्पात, सीमेंट और अन्य उद्योगों को माल परिवहन में बड़ी सुविधा मिलेगी। साथ ही मौजूदा रेलवे लाइनों पर मालगाड़ियों का दबाव कम होने से यात्री ट्रेनों के संचालन में भी सुधार आने की संभावना है।
रोजगार और कृषि क्षेत्र को भी होगा फायदा
परियोजना के निर्माण चरण में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। वहीं किसानों को अपनी उपज देश के बड़े बाजारों तक कम लागत और कम समय में पहुंचाने का विकल्प मिलेगा, जिससे कृषि और व्यापार दोनों क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
हालांकि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित ग्रामीणों और किसानों की चिंताएं भी बनी हुई हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने पारदर्शी प्रक्रिया, उचित मुआवजा और समयबद्ध पुनर्वास सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, दानकुनी-सूरत मालवाहक रेल कॉरिडोर परियोजना से दुर्ग जिले के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। (Dedicated Freight Corridor)