RNN24 ब्यूरो
रायपुर। राजधानी रायपुर में स्थित 11वीं शताब्दी के प्राचीन विरंचीनारायण एवं नरसिंहनाथ मंदिर ट्रस्ट की बेशकीमती जमीनों के कथित विक्रय को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सार्वजनिक न्यास की करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि को कथित रूप से बेहद कम कीमत पर बेचने और बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के रजिस्ट्री एवं नामांतरण किए जाने के पुख्ता सबूत सामने आए हैं। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री और उनके सचिवालय तक पहुंच चुकी है, जिसके बाद जांच के आदेश दिए गए।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि ग्राम धरमपुरा, पटवारी हल्का नंबर-78 स्थित खसरा नंबर 293/7 की लगभग 0.158 हेक्टेयर भूमि, जो विरंचीनारायण एवं नरसिंहनाथ मंदिर सार्वजनिक ट्रस्ट की संपत्ति है, उसे वर्ष 2022 में मात्र 21 लाख रुपये में बेच दिया गया। जबकि उस समय भी इस भूमि का बाजार मूल्य लगभग ढाई करोड़ रुपये से अधिक था। आज चार साल बाद इसकी कीमत का अंदाजा आप लगा सकते हैं।
ट्रस्ट संपत्तियों के अवैध विक्रय पर सुलगते सवाल
शिकायतों में प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार उक्त भूमि सार्वजनिक न्यास पंजीयन क्रमांक-116 के अंतर्गत दर्ज है। शिकायत में प्रस्तुत दस्तावेजों के अवलोकन से पता चलता है कि ट्रस्ट की बैठक आयोजित कर भूमि विक्रय का प्रस्ताव भारत माला घोटाले के आरोपी विजय जैन के दोनों लड़कों के नाम से पारित किया गया और पहली वास्तविक खरीददारी धनश्याम दानी ने की, लेकिन अंतिम रजिस्ट्री भारत माला घोटाले के मास्टरमाइंड हरमीत खनूजा के पार्टनर विवेक अग्रवाल के नाम पर कर दी गई।

मठ-मंदिरों के दर्जनों मामलों में भारतमाला परियोजना से जुड़े विवादों में रहे और पूर्व में भी चर्चित रहे विजय जैन, हरमीत सिंह खनूजा, अजय तिवारी, घनश्याम दानी, विवेक अग्रवाल तथा महंत देवदास के नामों का इस मामले में भी शामिल होना यह बताता है कि “हिन्दू धर्मावलंबीयों की विश्वास और आस्था की इन सफेदपोश हत्यारों ने ना जाने कितने बार हत्या की है।”

बिना अनुमति विक्रय कैसे ?
इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिकायतकर्ताओं ने दस्तावेज़ी प्रमाण के साथ दावा किया है कि सार्वजनिक न्यास की संपत्ति का विक्रय संबंधित प्राधिकारी की अनुमति के बिना किया गया। न तो पंजीयक, सार्वजनिक न्यास से स्वीकृति ली गई और न ही प्रबंधक के रूप में दर्ज कलेक्टर रायपुर की विधिवत अनुमति प्राप्त की गई।
कानूनी जानकारों के अनुसार सार्वजनिक न्यास की संपत्तियों के हस्तांतरण के लिए निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक होता है। यदि अनुमति के बिना विक्रय किया गया है तो उसकी वैधता पर ही प्रश्न उठ सकते हैं और यह हस्तांतरण पूरी तरह अवैध होता है। यही बिंदु अब जांच का सबसे प्रमुख विषय बन गया है।
राजस्व अभिलेखों में किया गया हेरफेर
शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि जमीन के विक्रय से पहले राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव किए गए। दावा किया गया है कि अभिलेखों में दर्ज “प्रबंधक, कलेक्टर रायपुर” का नाम विलोपित कर संपत्ति को निजी स्वामित्व के रूप में दर्शा दिया गया।
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इसके बाद कथित नामांतरण की प्रक्रिया में पूरी जमीन को निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कराया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, ताकि ट्रस्ट की संपत्ति को निजी हाथों में पहुंचाया जा सके और अपने निजी लाभों को पूरा किया जा सकें।
मुख्यमंत्री और उनके सचिवालय तक पहुंचा मामला
मामले की शिकायत मुख्यमंत्री और उनके सचिवालय में किए जाने के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू हुई थी जो अब अपने अंतिम चरण में है। सूत्रों के अनुसार अतिरिक्त तहसीलदार रायपुर को प्रकरण की जांच कर निर्धारित समयावधि में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। जांच के दौरान राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण दस्तावेज, विक्रय पत्र और ट्रस्ट से संबंधित अभिलेखों की पड़ताल की गई है।
वर्तमान हल्का पटवारी की रिपोर्ट में भी कुछ तथ्यों की जांच की आवश्यकता बताई गई है। इसके साथ ही अतिरिक्त तहसीलदार ने अपने जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से लिखा है कि “प्रबंधक, कलेक्टर रायपुर” शब्द को छोड़ते हुए अभिलेख दुरूस्त किया गया और प्रश्नाधीन भूमि को बिना सक्षम प्राधिकारी के अनुमति के क्रेता धनश्याम दानी के पक्ष में पंजीकृत विक्रय विलेख निष्पादित किया गया।
पुलिस मुख्यालय में उच्च स्तरीय जांच और एफआईआर की मांग
शिकायतकर्ताओं ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और एफआईआर कराने की मांग पुलिस मुख्यालय में भी की है। साथ ही प्रशासन से विवादित नामांतरण निरस्त करने, भूमि को पुनः ट्रस्ट के नाम दर्ज करने तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने की मांग की है।
महंत देवदास ने स्वीकारा, हरमीत खनूजा ने नकारा : विक्रय अवैध
प्रकरण में महंत देवदास द्वारा प्रशासन को दिए गए जवाब में कुछ आरोपों का खंडन किया गया है। जबकि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार उन्होंने विक्रय प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की अवैधानिकता स्वीकार की है। अब यह जांच का विषय नहीं है निर्णय का विषय है कि संबंधित प्रक्रिया कानून सम्मत थी या नहीं। इस मामले में भारत माला घोटाले के मास्टरमाइंड हरमीत खनूजा से जब रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 न्यूज चैनल की टीम ने चर्चा की तो आरोपों को स्पष्ट रूप से नकारते हुए कहा कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है मैंने यह जमीन धनश्याम दानी से खरीदी है। यदि इसमें कुछ हुआ तो मैं उनको ही क्लेम करूंगा।
कई सवालों के जवाब तलाश रही जांच : निर्णय बनेगा मील का पत्थर
यह मामला केवल एक भूमि विक्रय का नहीं बल्कि सार्वजनिक ट्रस्ट की संपत्तियों की सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
- क्या ट्रस्टों की जमीनों का विक्रय नियमानुसार किया गया?
- क्या सक्षम प्राधिकारी की अनुमति ली गई थी?
- क्या भूमि का वास्तविक बाजार मूल्य निर्धारित किया गया था?
- क्या राजस्व अभिलेखों में कोई अनियमित परिवर्तन हुआ?
- क्या किसी को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाया गया?
इन सभी सवालों के जवाब अब इस एक प्रशासनिक जांच और निर्णयों पर निर्भर हैं। क्योंकि यह एक जांच और निर्णय भविष्य में ‘मील का पत्थर’ साबित होगी।
प्राचीन धार्मिक और सार्वजनिक ट्रस्ट की संपत्तियों से जुड़े इस विवाद ने राजधानी में नई बहस छेड़ दी है। अब निगाहें प्रशासनिक जांच और निर्णयों पर टिकी हैं कि आखिर करोड़ों रुपये मूल्य की बताई जा रही इस भूमि के सौदे में क्या वास्तव में नियमों का उल्लंघन हुआ या फिर सभी प्रक्रियाएं कानून के दायरे में पूरी की गई थीं ? और यदि नहीं तो “विश्वास और आस्था” के ये हत्यारे कब सलाखों के पीछे होंगे ?



