केंद्र सरकार ने चांदी (Silver) के आयात को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने सिल्वर इंपोर्ट को ‘फ्री’ कैटेगरी से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ श्रेणी में डाल दिया है। यानी अब चांदी आयात करने के लिए सरकार की मंजूरी या लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। यह नया नियम शनिवार से लागू हो गया है।
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क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब देश में चांदी के आयात में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अप्रैल 2026 में सिल्वर इंपोर्ट सालाना आधार पर करीब 157 फीसदी बढ़ गया। वहीं वित्तीय वर्ष 2026 में चांदी का आयात 149.48% बढ़कर 12.05 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
सरकार इससे पहले सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर चुकी है। इसका उद्देश्य गैर-जरूरी आयात को नियंत्रित करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना है।
क्या बदलेगा अब?
सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, अब 99.9% शुद्धता वाली बुलियन ग्रेड चांदी और अन्य सिल्वर बार्स के आयात के लिए विशेष अनुमति लेनी होगी। ये उत्पाद हार्मोनाइज्ड सिस्टम (HS) कोड के तहत आते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वस्तुओं की पहचान के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
विदेशी मुद्रा बचाने पर सरकार का फोकस
हाल के दिनों में केंद्र सरकार ने लोगों से गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं से बचने और एक साल तक सोना खरीदने से परहेज करने की अपील भी की थी। सरकार का मानना है कि सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं के भारी आयात से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है।
हालांकि भारत के पास फिलहाल 690 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जो लगभग 10 महीनों के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त माना जाता है। इसके बावजूद सरकार वैश्विक परिस्थितियों और लंबे समय तक चल रहे युद्ध जैसे हालात को देखते हुए सतर्क रुख अपना रही है।
आंकड़ों में चांदी आयात की तेजी
- अप्रैल 2026 में चांदी का आयात बढ़कर 411.06 मिलियन डॉलर पहुंच गया।
- अप्रैल 2025 में यह आंकड़ा 159.85 मिलियन डॉलर था।
- रुपये के हिसाब से अप्रैल 2026 में सिल्वर इंपोर्ट 3,845.51 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 181.17% ज्यादा है।
वहीं मार्च 2026 में भारत ने 2,47,008 किलोग्राम चांदी आयात की, जो मार्च 2025 के मुकाबले करीब 91% अधिक रही।



