लोकेश्वर सिन्हा
गरियाबंद। जिले में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान एक भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया, जिसने सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी को उजागर कर दिया। देवभोग विकासखंड के माड़ागांव में आयोजित कार्यक्रम में विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समाज के कई परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना की मांग को लेकर अधिकारियों के सामने दंडवत होते नजर आए।
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जानकारी के अनुसार, देवभोग विकासखंड के बरही गांव में रहने वाले कमार जनजाति के परिवार लंबे समय से प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से जर्जर और कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं। बरसात के दौरान घरों में पानी टपकता है और कई परिवार असुरक्षित परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे हैं।
अधिकारियों के सामने लगाई गुहार
सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान जब जिला पंचायत सीईओ ग्रामीणों की समस्याएं सुन रहे थे, तभी कमार समाज के कई लोग अपनी मांग लेकर पहुंचे। कुछ महिलाएं और बुजुर्ग जमीन पर दंडवत होकर मदद की गुहार लगाने लगे, जबकि कुछ ने अधिकारियों के पैर पकड़कर अपनी समस्या बताई।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार आवेदन दिए और पंचायत से लेकर जनपद स्तर तक अपनी समस्या रखी, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि पात्र होने के बावजूद उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में शामिल नहीं किया गया।
“राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र” माने जाते हैं कमार समुदाय
कमार समाज को विशेष पिछड़ी जनजाति के रूप में संवेदनशील और संरक्षण योग्य समुदाय माना जाता है। सरकार इनके संरक्षण और विकास के लिए विशेष योजनाएं संचालित करने का दावा करती रही है। ऐसे में इस समुदाय के लोगों को बुनियादी आवास के लिए अधिकारियों के सामने दंडवत होना पड़ना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
व्यवस्था की संवेदनशीलता पर उठे सवाल
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी इस दृश्य पर चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर अब भी कई जरूरतमंद परिवार योजनाओं से वंचित हैं।
लोगों का कहना है कि यदि सुशासन तिहार जैसे कार्यक्रमों में भी गरीबों को अपनी बात मनवाने के लिए इस तरह गुहार लगानी पड़े, तो यह व्यवस्था की संवेदनशीलता और योजनाओं के क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।



