बिलासपुर । छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर की अग्रिम जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं मेहनती युवाओं के भविष्य से गंभीर खिलवाड़ हैं।
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मामले की सुनवाई जस्टिस बिभु दत्त गुरु की सिंगल बेंच में हुई। इस प्रकरण की जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है। आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर पर परीक्षा में धांधली और उम्मीदवारों से मोटी रकम वसूलने के गंभीर आरोप हैं।
जानकारी के अनुसार, रायपुर के रायपुर शांति नगर निवासी उत्कर्ष चंद्राकर पर आरोप है कि उसने चयन के बदले उम्मीदवारों से 50 से 60 लाख रुपये तक की मांग की थी। जांच में यह भी सामने आया है कि परीक्षा से पहले कई अभ्यर्थियों को रायपुर के सिद्धि विनायक पैलेस, बारनवापारा रिजॉर्ट और होटल वेंकटेश इंटरनेशनल में ठहराया गया था।
आरोप है कि 12 फरवरी 2022 को प्रारंभिक परीक्षा से एक दिन पहले लगभग 30 से 35 उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराए गए थे। वहीं मुख्य परीक्षा के दौरान भी मोबाइल के माध्यम से प्रश्नपत्र मंगवाकर अभ्यर्थियों को उत्तर याद करवाए जाने की बात सामने आई है।
इस मामले की एक अहम गवाह सुषमा अग्रवाल ने धारा 164 के तहत दिए बयान में बताया कि उत्कर्ष ने उससे 25 लाख रुपये लिए थे और 8 मई 2022 को उम्मीदवारों को बस से बारनवापारा रिजॉर्ट ले जाया गया, जहां लीक प्रश्नपत्रों के आधार पर तैयारी कराई गई।
यह पूरा मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है, जिसमें CGPSC की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों और रसूखदार उम्मीदवारों को चयन में प्राथमिकता दी गई।
राज्य सरकार ने इस मामले को सीबीआई को सौंपा था, जिसके बाद जांच एजेंसी ने कई ठिकानों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य बरामद किए हैं।
CGPSC 2021 भर्ती परीक्षा में 171 पदों के लिए प्रक्रिया हुई थी, जिसमें प्री परीक्षा में 2,565 उम्मीदवार पास हुए, मेंस परीक्षा में 509 अभ्यर्थी चयनित हुए और बाद में 170 अभ्यर्थियों की अंतिम चयन सूची जारी की गई थी।



