खैरागढ़। जिले के मैकाल रेंज के अंतर्गत आने वाली बैताल रानी घाटी में हाल ही में एक गौर (Indian Bison) की उपस्थिति दर्ज किए जाने से क्षेत्र एक बार फिर चर्चा में आ गई है। बीते दिन शाम करीब 5 बजे घाटी के ऊपरी हिस्से में यह विशाल वन्यजीव दिखाई दिया। जिसे खुडमूड़ी निवासी सत्यदेव चंदेल ने अपने मोबाइल के कैमरे में कैद कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गौर मुख्य सड़क से लगभग 20 मीटर की दूरी पर खड़ा था। कुछ देर तक राहगीर रुककर उसे देखते रहे। इसके बाद वह शांतिपूर्वक जंगल की ओर लौट गया.
पर्यावरण विशेषज्ञ
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है, कि बैताल रानी घाटी और उससे सटी मैकाल रेंज जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। यहां के घने वन, प्राकृतिक जलस्रोत और विविध वन्यजीव प्रजातियां इस इलाके को पारिस्थितिक रूप से समृद्ध बनाते हैं। मैकाल पर्वतमाला सतपुड़ा श्रृंखला का हिस्सा होने के कारण यह क्षेत्र कई संरक्षित वन क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक कॉरिडोर के रूप में कार्य करता है। ऐसे संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र में गौर की मौजूदगी इस बात का संकेत है, कि यहां का वन आवास अभी भी अपेक्षाकृत सुरक्षित और अनुकूल बना हुआ है।
गौर भारत की संरक्षित और संवेदनशील
गौर भारत की संरक्षित और संवेदनशील वन्यजीव प्रजातियों में शामिल है। बढ़ते मानव हस्तक्षेप और आवासीय दबाव के कारण इसके प्राकृतिक आवास लगातार प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में बैताल रानी घाटी में इसकी उपस्थिति स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। और यह वन संरक्षण के प्रयासों की अहमियत को भी रेखांकित करती है। घटना के बाद वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और गौर की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। वन विभाग ने स्थानीय लोगों और राहगीरों से अपील की है, कि वे वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या भीड़ न लगाएं। ताकि मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। वन विशेषज्ञों का मानना है, कि यदि स्थानीय समुदाय, प्रशासन और वन विभाग मिलकर इस प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करें।



