रायपुर : नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) की निरीक्षण प्रक्रिया में फैले बड़े भ्रष्टाचार को बेनकाब करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 27 नवंबर को देशभर के 9 राज्यों में 15 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इसमें 7 निजी मेडिकल कॉलेज भी शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान ईडी ने कई मोबाइल फोन, सर्वर डेटा और अहम दस्तावेज जब्त किए हैं।
रावतपुरा मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर के घर ईडी की पूछताछ
रायपुर में रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी के घर ईडी ने पूछताछ की। अधिकारियों के अनुसार, पूरा नेटवर्क स्कैन में है और जल्द ही कई बड़े नामों से पूछताछ हो सकती है।
यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि 100 सीटें बढ़ाने की डील में हवाला के जरिए 55 लाख रुपये का लेन-देन हुआ था।
सीबीआई की एफआईआर पर ईडी की एक्शन
सीबीआई की 30 जून को की गई कार्रवाई के बाद यह मामला ईडी तक पहुंचा। जांच में सामने आया कि:
कई प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधि
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और एनएमसी के कुछ अधिकारी
मिलकर मेडिकल निरीक्षण की गोपनीय जानकारी बिचौलियों को बेच रहे थे। इसके बदले कॉलेज फर्जी तरीके से मान्यता और सीट वृद्धि हासिल करते थे।
इंस्पेक्शन में फर्जीवाड़े का खुलासा
सीबीआई की एफआईआर में चौंकाने वाले खुलासे हुए:
मेडिकल कॉलेजों में फर्जी स्टाफ और प्रोफेसर तैनात किए जाते थे
निरीक्षण के दौरान नकली मरीज भर्ती किए जाते थे
निरीक्षण टीम को रिश्वत देकर पॉजिटिव रिपोर्ट तैयार करवाई जाती थी
जिन मेडिकल कॉलेजों पर कार्रवाई हुई
- श्री रावतपुरा सरकार मेडिकल साइंसेज, रायपुर
- इंडेक्स मेडिकल कॉलेज, इंदौर
- गायत्री मेडिकल कॉलेज, विशाखापत्तनम
- फादर कोलंबो मेडिकल साइंसेज, वारंगल
- स्वामीनारायण मेडिकल साइंसेज, कल्लोल
- नेशनल कैपिटल रीजन मेडिकल साइंसेज, मेरठ
- श्यामलाल मेडिकल कॉलेज, खगड़िया
55 लाख रिश्वत की बरामदगी
सीबीआई ने बेंगलुरु में जाल बिछाकर रिश्वत की रकम बरामद की:
- 16.62 लाख डॉ. चैत्रा के पति रविन्द्रन से
- 38.38 लाख डॉ. मंजप्पा के आदमी सतीश ए से
- कुल 6 आरोपी गिरफ्तार किए गए थे, जिनमें से 5 को जमानत मिल चुकी है।
- रावतपुरा में सीट बढ़ाने के लिए 55 लाख की डील
30 जून 2025 को एनएमसी का निरीक्षण दल रावतपुरा कॉलेज पहुंचा था। कॉलेज में 150 सीटें थीं और प्रबंधन 100 और सीटें चाहता था। आरोप है कि:
- डायरेक्टर अतुल तिवारी ने निरीक्षण टीम को रिश्वत की पेशकश की
- डॉ. मंजप्पा ने हवाला ऑपरेटर से रकम उठाने के लिए अपने सहयोगी सतीश को भेजा
- डॉ. चैत्रा का हिस्सा उनके घर भेजा गया
- इसी दौरान सीबीआई को सूचना मिली और पूरा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।




