पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर/बस्तर. छत्तीसगढ़ में क्षेत्रीय विकास को नई गति देने के लिये मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन का वाणिज्य एवं उद्योग विभाग 11 सितंबर को बस्तर में इन्वेस्टर कनेक्ट का आयोजन करने जा रहा है। राज्य सरकार अब छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट के माध्यम से निवेश संभावनाओं को बस्तर में तलाश रही है। वहीं राजधानी रायपुर की महिला व्यवसायी अनुसुइया साहू न्याय की तलाश में 11 महीने से दर दर की ठोकरें खाते हुए उसी बस्तर में भटक रहीं हैं।

ये ठेठ छत्तीसगढ़िया महिला की एक हदय विदारक और मार्मिक सच्चाई है। जेठ पूरे तरीके से मरणासन्न अवस्था में है, पति स्वास्थ्यगत कारणों से बिस्तर में है, ससुर व्यवसायिक संस्थान में क़ब्ज़े से आहत होकर मतिभ्रम के शिकार हो गए और एक दिन सुबह पचपेड़ी नाका में अज्ञात वाहन की चपेट में आ कर इस संसार को छोड़कर चले गए।

50 वर्षीय अनुसुइया की शैक्षणिक योग्यता नहीं है। बा मुश्किल हस्ताक्षर कर पाती है पंरतु शिक्षा के महत्व को बाखूबी जानती है। अपने और अपने जेठ के बच्चों को बहुत ऊंची शिक्षा दिलाई और सभी ने व्यवसाय प्रबंधन में बड़ी डिग्री प्राप्त की। कुछ वर्ष पूर्व अपने जेठ के पुत्र एवं अपने पुत्र के लिए रायपुर में टाईल्स का व्यवसाय शुरू किया। दोनों होनहार लड़कों ने व्यवसाय को बुलंदियों में पहुंचाया। व्यवसाय के विस्तार के लिए अनुसुइया ने बस्तर को चुना क्योंकि बस्तर के नैसर्गिक सौंदर्य के साथ स्थानीय निवासियों की सरलता – सौम्यता से प्रेम और वैवाहिक जीवन की सुंदर यादें थी।

वर्ष 2023 में जगदलपुर के गोदाम को किराए में लेकर टाईल्स का ही व्यवसाय शुरू किया। व्यवसाय ने रफ्तार पकड़ी तो बैंक और परिजनों से 2 करोड़ का ऋण लेकर शानदार शोरूम शुरू किया। 10 से ज्यादा स्थानीय निवासियों को रोजगार उपलब्ध कराया। मैनेजर के रूप में ओमप्रकाश श्रीवास्तव नामक व्यक्ति की नियुक्ति की। इस व्यक्ति की नियुक्ति के साथ व्यवसाय को कब्जाने का खेल शुरू हुआ। उसने कूटरचना कर अनुसुइया की फर्म गोविंद गोपाल टाईल्स एंड सेनेटरी के नाम पर गुमाश्ता और जी.एस.टी. रजिस्ट्रेशन कर पूरे व्यवसाय में कब्जा कर लिया।

पुत्र के साथ भंयकर मारपीट से भयभीत इस ठेठ छत्तीसगढ़िया महिला ने कमर कस कर लड़ाई की ठान ली। दो महीने की लंबी जद्दोजहद के बाद बोधघाट थाने में मारपीट की रिपोर्ट तो दर्ज नहीं हुई पंरतु दस्तावेजों के आधार पर 1.20 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी, कूटरचना और अमानत में ख़यानत का अपराध पंजीबद्ध हुआ। विवेचना में साक्ष्यों के आधार पर कुछ दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में आरोपी ओमप्रकाश श्रीवास्तव जेल निरूद्ध रहा। जेल से छूट कर उसने बंद शोरूम और गोदाम का ताला तोड कर फिर से कब्जा कर लिया।

अगस्त में जिला एवं सत्र न्यायालय में लंबित मामले में अनुसुइया के गवाहों को कोर्ट परिसर में भंयकर रुप से धमकाया गया। इस बार फिर बोधघाट थाने में मामला दर्ज हुआ। इसी मामले में अनुसुइया ने सी.जी.एम कोर्ट में अर्जी दाखिल की, मामला लंबित है। साथ ही सेशन कोर्ट में आरोपी की जमानत खारिज करने के लिए आवेदन दिया। बोधघाट थाने ने भी लिख कर दिया की आरोपी जमानत की शर्तों का उलंघन कर रहा है उसकी जमानत खारिज की जाये। मामला लंबित है।

अगस्त के आखरी दिनों में अनुसुइया अपने बेटे को लेकर अपने व्यवसायिक संस्थान पहुंची तो आरोपी ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने चाकू से हमला कर दिया। किसी तरह अपने बेटे को बचाकर थाने पहुंची। थाने में 8 घंटे बैठने के बाद फिर से गंभीर धाराओं और आर्म्स एक्ट में आरोपी के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध हुआ। पंरतु पुलिस द्वारा विस्तृत जानकारी ना देने के कारण आरोपी को जमानत मिल गई। जिस शोरूम और गोदाम में अनुसुइया ने 6 सितंबर को ताला लगाया था उसे 10 सितंबर को आरोपी ने तोड दिया और फिर से कब्जे में ले लिया।
क्यों, क्योंकि सत्ताधारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का वरदहस्त है आरोपी के ऊपर। परिजनों का दोस्ताना है दुर्ग जिले के युवा विधायक के साथ जो खुद भी रायपुर सेन्ट्रल जेल में महीनों गुज़ार चुके हैं।
रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 न्यूज चैनल ने जब अनुसुइया से मुलाकात की तो आंखों में पानी था पर जबरदस्त जज्बा था लड़ने का, अपने हक की लड़ाई और न्याय की जीत का। जिस महिला ने कभी थाने के सिपाही से बात नहीं की वो जा रही है हर चौखट – पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर, कमिश्नर के साथ जिला न्यायाधीश के पास। अपने गहने बेच कर भी वो लड़ने को तैयार हैं ये सत्य और असत्य की लड़ाई।
ये महिला है ठेठ छत्तीसगढ़िया अनुसुइया साहू। इसने कहा कि बस्तर के इन्वेस्टर्स मीट में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मैं अपना न्याय मांगूंगी। मैंने जीवन भर ‘विष्णु” की पूजा की है कैसे नहीं देगा विष्णु मुझे न्याय। हमारी हिम्मत ही नहीं हुई कैमरे चालू करने की, बस मन में ख्याल आता रहा जब जब अनुसुइया अपने ‘विष्णु’, ‘नारायण’ और ‘वासुदेव’ को याद कर रही थी तो “विष्णु का सुशासन”……………?



