लोकेश्वर सिन्हा, गरियाबंद
गरियाबंद। आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर के ग्राम ओंकार पारा की शासकीय प्राथमिक शाला में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। यहाँ 5 छात्र-छात्राओं की दर्ज संख्या है, जिनके लिए 2 शिक्षक पदस्थ हैं, लेकिन विभागीय लापरवाही ने इन मासूमों का भविष्य अंधकार में डाल दिया है।
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दरअसल, स्कूल का ई-डाइस कोड बंद होने के कारण बच्चों को मध्यान्ह भोजन, स्कूली गणवेश और पाठ्यपुस्तकें तक नहीं मिल पा रही हैं। ग्राम पंचायत गुरजीभाँटा (T) से स्कूल की दूरी करीब 4 किलोमीटर है और यह इलाका घने जंगलों के बीच स्थित है, इसलिए स्कूल का मर्जर भी संभव नहीं है।
शाला प्रबंधन समिति ने कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर कोड पुनः शुरू करने की मांग की, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की यह अनदेखी बच्चों के शिक्षा के अधिकार का खुला उल्लंघन है।
इस पूरे मामले में संकुल समन्वयक पदु सिंह नागेश ने बताया कि वे पहले ही उच्च अधिकारियों को समस्या से अवगत करा चुके हैं। अब देखना यह होगा कि कब तक इन आदिवासी बच्चों को सरकार की मूलभूत योजनाओं का लाभ मिल पाता है।



