पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक )
रायपुर/बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के विद्वान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की एकल पीठ ने आज भारत माला प्रोजेक्ट घोटाले (Bharat Mala Project Scam) से जुड़े सभी शासकीय अधिकारी-कर्मचारीयों की अंतरिम जमानत खारिज कर दी है। अंतरिम जमानत के खारिज होने से सभी 8 आरोपियों के ऊपर अब गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
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पिछले दिनों ई.ओ.डब्लू. और ए.सी.बी ने रायपुर जिला न्यायालय में भारत माला प्रोजेक्ट घोटाले (Bharat Mala Project Scam) में 7500 पन्नों की पहली चार्जशीट दाखिल की थी। जिसमें स्पष्ट उल्लेख किया था कि तात्कालिक एसडीएम निर्भय साहू, तात्कालिक तहसीलदार शशिकांत कुर्रे, तात्कालिक नायाब तहसीलदार लखेश्वर किरण, तात्कालिक राजस्व निरीक्षक रोशन लाल कुर्रे, तात्कालिक पटवारी दिनेश पटेल, जितेन्द्र साहू, लेखराम देवांगन और बसंती घृतलहरे ने मिलकर इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया था।
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ई.ओ.डब्ल्यू और ए.सी.बी ने भारत माला परियोजना से संबंधित मुआवजा राशि घोटाले में अपराध क्रमांक 30/2025 में 30 अक्टूबर को माननीय विशेष न्यायालय, रायपुर में जो 7500 पन्नों का प्रथम अभियोग पत्र प्रस्तुत किया था उसमें स्पष्ट उल्लेख था कि विवेचना के दौरान राजस्व अधिकारी-कर्मचारी अभियुक्तगण निर्भय साहू (तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व, अभनपुर), दिनेश पटेल (हल्का पटवारी), रोशन लाल वर्मा (राजस्व निरीक्षक), शशिकांत कुर्रे (तत्कालीन तहसीलदार), जितेन्द्र साहू (तत्कालीन हल्का पटवारी क्रमांक 49, नायकबांधा), बसंती घृतलहरे (तत्कालीन पटवारी), लखेश्वर प्रसाद किरण (तत्कालीन नायब तहसीलदार, गोबरा नवापारा) तथा लेखराम देवांगन (पटवारी) के निरंतर फरार रहने और न्यायालय से राहत मिलने उपरांत विवेचना में सहयोग न करने से आपराधिक षड्यंत्र, पद के दुरुपयोग एवं अवैध लाभ से संबंधित साक्ष्य संकलन प्रभावित रहा है .
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अतः इनके विरुद्ध अग्रिम विवेचना जारी है और उनकी भूमिका के संबंध में पृथक चालान प्रस्तुत किया जाएगा। इसे ही आधार मान कर वरिष्ठ शासकीय अधिवक्ता की दलीलों को सही मानते हुए आज छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के विद्वान चीफ जस्टिस ने इन सभी की अंतरिम जमानत ख़ारिज़ कर दी है। जो कि अलग अलग समय में दी गई थी।
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ईओडब्ल्यू और ए.सी.बी. ने प्रकरण की विवेचना में यह पाया था कि राजस्व अधिकारियों ने मिलीभगत से बैक डेट में फर्जी दस्तावेज तैयार कर भूमि का बंटवारा व नामांतरण करवाया तथा इन फर्जी दाखिलों के आधार पर अधिक मुआवज़ा दिया गया, जिससे शासन को लगभग ₹28 करोड़ का प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान हुआ। वहीं नायकबांधा जलाशय में यह पाया गया कि पहले से अधिग्रहित भूमि के संबंध में अनुचित रूप से पुनः मुआवज़ा भुगतान कर शासन को ₹2 करोड़ से अधिक की हानि हुई।
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नायकबांधा जलाशय से संबंधित जल संसाधन उपसंभाग के मामलों में तत्कालीन अधिकारी नरेन्द्र नायक और गोपाल वर्मा ने अन्य सह-अभियुक्तों (शासकीय अधिकारी-कर्मचारी ) के साथ मिलकर डूबान क्षेत्र से जुड़े पूर्व अधिग्रहण अभिलेखों को दबाया तथा मिथ्या प्रतिवेदन तैयार किये। इन कार्यों से शासन को करोड़ों रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक क्षति हुई और प्रभावित किसानों को उनके वैध हक से वंचित किया गया।
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इसके अतिरिक्त अन्य संबंधित राजस्व एवं तकनीकी अधिकारीगण द्वारा भी अधिग्रहण से संबंधित अभिलेखों में हेराफेरी तथा वास्तविक स्थिति छिपाने जैसी अनियमितताएं की गयीं, जिससे आपराधिक षड्यंत्र और अधिक सुदृढ़ हुआ। इस पूरे मामले में अभी विवेचना जारी है।
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राजनैतिक और प्रशासनिक हलकों में बताया जा रहा है कि ये राशि सैकड़ों करोड़ रुपए से ऊपर जायेगी साथ ही कुछ आई.ए.एस और आई.पी.एस अफसरों के भी शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। (Bharat Mala Project Scam)
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