बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2015 के नान घोटाले से संबंधित सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अब जिन लोगों के खिलाफ एसीबी ने चालान नहीं किया, उनके खिलाफ विचारण न्यायालय में धारा 319 के तहत आवेदन लगाकर कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही धरमलाल कौशिक द्वारा एसआईटी जांच के खिलाफ लगाई गई याचिका को वापस लेने की अनुमति भी दी गई।
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सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के निराकरण के बाद हाईकोर्ट की विशेष खंडपीठ (चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस पीपी साहू) ने सभी जनहित याचिकाओं की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने नोट किया कि केवल “हमर संगवारी” एनजीओ और अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ही उपस्थित थे, जबकि अन्य याचिकाओं की ओर से कोई नहीं आया।
अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने बताया कि एसीबी ने कई लोगों को छोड़ दिया है, जिनकी सीधी भूमिका होने के बावजूद उन्हें अभियुक्त नहीं बनाया गया, जैसे जहरीले नमक सप्लाई करने वाले मुनीश कुमार शाह की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई। उन्होंने कहा कि उनकी याचिका का उद्देश्य उन व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई सुनिश्चित करना था।
खंडपीठ ने इस पर कहा कि ऐसी मांग विचरण न्यायालय में धारा 319 के तहत पूरी की जा सकती है और 10 साल से लंबित मामले में अब जांच एजेंसी बदलने की मांग उचित नहीं है। इसी कारण सभी जनहित याचिकाओं को निराकृत कर दिया गया।
नान घोटाला छत्तीसगढ़ की पीडीएस और राशन वितरण प्रणाली में गड़बड़ी से जुड़ा था। एसीबी की चार्जशीट के अनुसार, नागरिक आपूर्ति निगम ने 55 लाख परिवारों के बावजूद 70 लाख राशन कार्ड बनाए और हजारों करोड़ के राशन का गबन किया गया। अधूरी जांच और अभियुक्तों की अनदेखी के कारण मामले में पर्याप्त कार्रवाई नहीं हो पाई।
2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद एसआईटी गठित हुई, लेकिन भाजपा नेताओं की याचिकाओं के चलते मामले में लंबी सुनवाई और विवाद चलता रहा। अब हाईकोर्ट ने जनहित याचिकाओं का मार्ग साफ करते हुए उन्हें खारिज कर दिया है।



