दुर्ग। छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों की प्रारंभिक मतदाता सूची को लेकर सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने दुर्ग जिले के चार नगरीय निकायों में मतदाताओं के वार्ड बदलने को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि भिलाई, रिसाली, भिलाई-चरोदा नगर निगम और जामुल नगर पालिका की प्रारंभिक मतदाता सूची में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम एक वार्ड से दूसरे वार्ड में स्थानांतरित किए गए हैं। कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए चेतावनी दी है कि यदि शिकायतों का निराकरण नहीं हुआ तो पार्टी हाईकोर्ट का रुख करेगी।
भिलाई नगर निगम में सैकड़ों मतदाताओं के वार्ड बदले जाने का दावा
गुरुवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में भूपेश बघेल ने भिलाई नगर निगम की प्रारंभिक मतदाता सूची में हुए बदलावों का आंकड़ा सामने रखा। उन्होंने बताया कि वार्ड 3 से 5 में 192, वार्ड 5 से 3 में 493, वार्ड 9 से 10 में 721 और वार्ड 9 से 11 में 556 मतदाताओं के नाम स्थानांतरित किए गए हैं।
इसी तरह वार्ड 15 से 14 में 232, वार्ड 17 से 18 में 316 और वार्ड 59 से 60 में 228 मतदाताओं के स्थानांतरण का दावा भी किया गया।
रिसाली और भिलाई-चरोदा में भी उठे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने रिसाली नगर निगम की मतदाता सूची में भी बदलावों को लेकर आपत्ति जताई। उनके मुताबिक, वार्ड 3 से 4 में 250, वार्ड 25 से 24 में 358 और वार्ड 26 से 31 में 416 मतदाताओं के नाम स्थानांतरित किए गए हैं।
वहीं भिलाई-चरोदा नगर निगम में वार्ड 2 से 3 में 202 और वार्ड 22 से 23 में 304 मतदाताओं के नाम स्थानांतरित होने का दावा किया गया। जामुल नगर पालिका के वार्ड 20 से 19 में भी 196 मतदाताओं के नाम स्थानांतरित किए जाने का मुद्दा उठाया गया।
30 अक्टूबर तक दर्ज करा सकते हैं आपत्ति
भूपेश बघेल ने कहा कि प्रारंभिक मतदाता सूची में सामने आई कथित गड़बड़ियों को लेकर आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया 30 अक्टूबर तक जारी है। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और प्रभावित मतदाताओं से इस प्रक्रिया पर नजर रखने की बात कही।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में दर्ज आपत्तियों का उचित निराकरण नहीं किया गया तो कांग्रेस इस मामले को लेकर हाईकोर्ट जाएगी।
फिलहाल मतदाता सूची में वार्ड परिवर्तन को लेकर कांग्रेस के आरोपों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अब देखना होगा कि निर्वाचन से जुड़े अधिकारी इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करते हैं और आपत्तियों के निराकरण के बाद मतदाता सूची में क्या बदलाव होते हैं।




