रायगढ़। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में रायगढ़ की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) ने आरोपी दीपक बुदुला को 20 साल के कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं, मामले में नामजद शिवा पटनायक को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया।
यह भी पढ़े :- Asian Games 2026: मीराबाई चानू ने जीता सिल्वर, 28 साल बाद वेटलिफ्टिंग में भारत को मिला मेडल
मामला तब सामने आया जब नाबालिग पीड़िता ने जनवरी 2025 में एक बच्चे को जन्म दिया। अस्पताल से जानकारी मिलने के बाद जिला बाल संरक्षण इकाई ने मामले को संज्ञान में लिया। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की काउंसलर को इसकी सूचना मिलने पर टीम अस्पताल पहुंची और बाद में नाबालिग की काउंसलिंग की गई।
अभियोजन के अनुसार, दूसरी काउंसलिंग के दौरान पीड़िता ने वर्ष 2023 से हुई घटनाओं के संबंध में जानकारी दी। उसने आरोप लगाया कि मई 2023 में दीपक बुदुला उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया और वहां उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। बाद में वह गर्भवती हो गई और 19 जनवरी 2025 को बच्चे को जन्म दिया।
काउंसलिंग के बाद बाल कल्याण समिति की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने जांच के दौरान दीपक बुदुला को गिरफ्तार किया और मामले में उपलब्ध साक्ष्यों व बयानों के आधार पर आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
प्रकरण की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं FTSC कोर्ट, रायगढ़ देवेंद्र यादव की अदालत में हुई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दीपक बुदुला को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
वहीं, मामले में नामजद शिवा पटनायक के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं होने पर अदालत ने उसे दोषमुक्त कर दिया। मामले में विशेष लोक अभियोजक गोविंद नारायण दुबे ने अभियोजन की ओर से पैरवी की .




