Muhurat Trading 2026 : दिवाली के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार में आज 8 नवंबर को मुहूर्त ट्रेडिंग का विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर निवेशकों को संवत 2083 की शुरुआत के साथ शुभ कारोबार करने का मौका मिलेगा। इस विशेष सत्र में दोपहर 2 बजकर 20 मिनट से 3 बजकर 30 मिनट तक सामान्य ट्रेडिंग होगी। शेयर बाजार में मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा दशकों पुरानी है। निवेशक इस दिन प्रतीकात्मक खरीदारी के साथ नए संवत की शुरुआत करते हैं।
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हालांकि, इस बार मुहूर्त ट्रेडिंग ऐसे समय हो रही है, जब पिछले कारोबारी सप्ताह में बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली है। सेंसेक्स में 6,569 अंकों की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी में करीब 9 फीसदी की तेजी रही। इस तेजी के चलते BSE में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में लगभग 29 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। ऐसे में निवेशकों की नजर इस विशेष सत्र पर टिकी हुई है। लेकिन सवाल यह है कि क्या मुहूर्त ट्रेडिंग में खरीदारी करना फायदे का सौदा साबित हो सकता है और निवेशकों को किन शेयरों पर ध्यान देना चाहिए? (Muhurat Trading 2026)
Muhurat Trading 2026: आज कितने बजे खुलेगा शेयर बाजार?
दिवाली के मौके पर रविवार, 8 नवंबर 2026 को BSE और NSE पर मुहूर्त ट्रेडिंग का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान निवेशकों को शेयर बाजार में कारोबार के लिए एक घंटे का समय मिलेगा। निवेशक अपने मौजूदा डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए शेयरों की खरीद-बिक्री कर सकेंगे।
मुहूर्त ट्रेडिंग का पूरा शेड्यूल इस प्रकार है:
| गतिविधि | समय |
|---|---|
| प्री-ओपन सेशन | दोपहर 2:05 से 2:17 बजे |
| सामान्य ट्रेडिंग | दोपहर 2:20 से 3:30 बजे |
| क्लोजिंग ऑक्शन की शुरुआत | दोपहर 3:15 बजे |
| क्लोजिंग प्रोसेस | दोपहर 3:35 बजे तक |
यह विशेष सत्र सामान्य कारोबारी दिनों से अलग होता है। इसलिए निवेशकों को ट्रेडिंग शुरू होने से पहले अपने ब्रोकर के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सेगमेंट और ऑर्डर से जुड़े नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।
क्या होती है मुहूर्त ट्रेडिंग? कब हुई थी इसकी शुरुआत?
मुहूर्त ट्रेडिंग भारतीय शेयर बाजार की एक पुरानी और खास परंपरा है। इसकी शुरुआत साल 1957 में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) से हुई थी। इसके बाद साल 1992 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने भी इस परंपरा को अपनाया।
हिंदू धर्म में दिवाली को नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा कर धन और समृद्धि की कामना की जाती है। इसी धार्मिक मान्यता के साथ शेयर बाजार में भी नए हिंदू संवत की शुरुआत पर विशेष ट्रेडिंग सत्र आयोजित किया जाता है।
पहले इस अवसर पर शेयर बाजार के ब्रोकर अपनी बही-खातों की पूजा करते थे, जिसे चोपड़ा पूजन कहा जाता है। धीरे-धीरे यह परंपरा निवेशकों के लिए भी खास बन गई। आज बड़ी संख्या में निवेशक दिवाली के दिन प्रतीकात्मक रूप से शेयर खरीदकर नए संवत का स्वागत करते हैं।
मुहूर्त ट्रेडिंग में कैसे खरीदें शेयर? जानें आसान तरीका
अगर आप पहली बार मुहूर्त ट्रेडिंग में हिस्सा लेने जा रहे हैं, तो इसके लिए अलग से कोई डीमैट अकाउंट खोलने की जरूरत नहीं है। आप अपने मौजूदा ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट के जरिए ही कारोबार कर सकते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान:
1. ट्रेडिंग अकाउंट में लॉगिन करें: अपने ब्रोकर के मोबाइल ऐप या वेबसाइट पर जाकर अकाउंट में लॉगिन करें। ट्रेडिंग शुरू होने से पहले उपलब्ध सेगमेंट की जानकारी लें।
2. सोच-समझकर चुनें शेयर: केवल दिवाली का शुभ अवसर देखकर किसी भी कंपनी के शेयर न खरीदें। कंपनी का बिजनेस मॉडल, वित्तीय स्थिति, कमाई और भविष्य की संभावनाएं जरूर जांचें।
3. लिमिट ऑर्डर का करें इस्तेमाल: मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान शेयरों की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है। ऐसे में अपनी पसंद की कीमत तय करने के लिए लिमिट ऑर्डर का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
4. निवेश की रकम पहले तय करें: त्योहार के उत्साह में अपनी आर्थिक क्षमता से ज्यादा पैसा निवेश करने से बचें। उतनी ही रकम लगाएं, जितना जोखिम आप उठा सकते हैं।
5. लंबी अवधि का नजरिया रखें: केवल शुभ दिन होने के कारण किसी शेयर में निवेश करना सही रणनीति नहीं है। निवेश से पहले कंपनी की गुणवत्ता और शेयर के मौजूदा मूल्यांकन को समझना जरूरी है।
मुहूर्त ट्रेडिंग 2026 में कैसी होनी चाहिए निवेश की रणनीति?
शेयर बाजार में हालिया तेजी के बाद निवेशकों को इस विशेष सत्र में सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऑफ रिसर्च अजीत मिश्रा का मानना है कि बाजार का रुख फिलहाल सतर्कता के साथ सकारात्मक है। हालांकि, हालिया तेजी के बाद बीच-बीच में मुनाफावसूली और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
उनके मुताबिक, निवेशकों को मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए। ऐसी कंपनियां जिनका बिजनेस मॉडल मजबूत है और जिनमें भविष्य में कमाई की अच्छी संभावनाएं हैं, उनमें चुनिंदा निवेश करना बेहतर हो सकता है।
वहीं, मास्टर कैपिटल सर्विसेज के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह ने भी मुहूर्त ट्रेडिंग को शॉर्ट टर्म सट्टेबाजी के बजाय लंबी अवधि के निवेश के नजरिए से देखने की सलाह दी है। उनके अनुसार, बाजार में तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी करने से बचना चाहिए। निवेशकों के लिए लिमिट ऑर्डर और चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाना समझदारी भरा कदम हो सकता है।
क्या मुहूर्त ट्रेडिंग में मुनाफा कमाने की गारंटी होती है?
मुहूर्त ट्रेडिंग को शुभ शुरुआत और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इस दिन खरीदे गए शेयरों से मुनाफा होना तय है। शेयर बाजार में निवेश हमेशा जोखिम के अधीन होता है।
इस विशेष सत्र में कारोबार का समय सीमित रहता है और कई बार ट्रेडिंग वॉल्यूम भी सामान्य दिनों की तुलना में कम हो सकता है। ऐसे में शेयरों की कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मुहूर्त ट्रेडिंग के दिन बाजार में तेजी आने का अर्थ यह नहीं है कि अगले कारोबारी सत्रों में भी बाजार लगातार बढ़ेगा। इसलिए निवेशकों को भावनाओं के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर फैसला लेना चाहिए।
मुहूर्त ट्रेडिंग में निवेश करने से पहले इन 5 गलतियों से बचें
- केवल दिवाली के उत्साह में बिना रिसर्च किए शेयर न खरीदें।
- किसी शेयर में निवेश से पहले कंपनी के फंडामेंटल और वैल्यूएशन की जांच करें।
- एक घंटे के सत्र में जल्दी मुनाफा कमाने के चक्कर में ज्यादा जोखिम न लें।
- अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव से बचने के लिए लिमिट ऑर्डर का इस्तेमाल करें।
- अपनी पूरी निवेश राशि एक साथ लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाएं।
मुहूर्त ट्रेडिंग को नए संवत की शुभ शुरुआत के रूप में देखा जाता है। ऐसे में निवेशकों के लिए बेहतर यही होगा कि वे इस अवसर का इस्तेमाल मजबूत कंपनियों में सोच-समझकर निवेश करने के लिए करें। याद रखें, शेयर बाजार में लंबे समय की सफलता का आधार अनुशासन, सही जानकारी और जोखिम प्रबंधन है, न कि केवल शुभ मुहूर्त।




