नई दिल्ली/बिलासपुर। भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-65 के निर्वाचन से जुड़ी याचिका के मामले में विधायक देवेंद्र यादव को सुप्रीम कोर्ट से एक और झटका लगा है। निर्वाचन याचिका को नियमित ट्रायल तक पहुंचने से रोकने की उनकी कोशिश सफल नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट ने देवेंद्र यादव की ओर से दायर SLP (Civil) No. 28778/2026 को खारिज कर दिया। इसके बाद अब 31 अगस्त से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनाव याचिका के नियमित ट्रायल का रास्ता साफ हो गया है।
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सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 30 जून 2026 के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया और विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी।
2023 के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका
यह मामला निर्वाचन याचिका क्रमांक 9/2024 से जुड़ा है। इसमें वर्ष 2023 के भिलाई नगर विधानसभा चुनाव में देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती दी गई है। याचिका में नामांकन शपथ-पत्र में आवश्यक वैधानिक जानकारियों के समुचित प्रकटीकरण और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत निर्वाचन की वैधता से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।
भिलाई नगर सीट पर वर्ष 2023 का चुनाव करीब 1,200 मतों के अंतर से तय हुआ था।
पहले Order VII Rule 11, अब Order XIV Rule 2 में भी राहत नहीं
देवेंद्र यादव ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के Order XIV Rule 2 और धारा 151 के तहत I.A. No. 18/2026 दाखिल की थी। इसमें मुद्दा क्रमांक 2 और 4 को प्रारंभिक मुद्दों के रूप में तय करने की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट ने 30 जून 2026 को उनकी मांग खारिज कर दी थी। अदालत ने माना कि संबंधित मुद्दे तथ्य और कानून के मिश्रित प्रश्न हैं और इनका उचित निर्धारण पक्षकारों के साक्ष्य सामने आने के बाद नियमित ट्रायल में किया जाना चाहिए।
इसी आदेश के खिलाफ देवेंद्र यादव सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन सर्वोच्च अदालत से भी उन्हें राहत नहीं मिली। इससे पहले Order VII Rule 11 CPC के तहत निर्वाचन याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज कराने की उनकी कोशिश भी सफल नहीं हुई थी। इससे संबंधित SLP (Civil) No. 6306/2025 को सुप्रीम कोर्ट ने 24 फरवरी 2026 को खारिज किया था।
अब साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद निर्वाचन विवाद अब नियमित ट्रायल की ओर बढ़ेगा। 31 अगस्त से हाईकोर्ट में निर्धारित मुद्दों पर साक्ष्य पेश किए जाएंगे। दोनों पक्षों के गवाहों की परीक्षा और प्रतिपरीक्षा होगी तथा चुनाव से जुड़े दावों और बचाव के समर्थन में दस्तावेज व अन्य साक्ष्य न्यायालय के समक्ष रखे जाएंगे।
देवेंद्र यादव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने पैरवी की, जबकि अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड सुमीर सोढ़ी ने उनका प्रतिनिधित्व किया।
निर्वाचन की वैधता पर अंतिम फैसला अभी बाकी
सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश देवेंद्र यादव का निर्वाचन रद्द नहीं करता है। चुनाव की वैधता पर अंतिम फैसला अभी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को ही करना है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद अब निर्वाचन याचिका की सुनवाई तकनीकी आपत्तियों से आगे बढ़कर दस्तावेजों, साक्ष्यों और गवाहों की जांच के चरण में पहुंच गई है।




