नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में दोषी करार दिए गए शूटर चिमन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी सजा के क्रियान्वयन पर अंतरिम राहत देते हुए उन्हें जमानत प्रदान कर दी है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल अंतरिम है और उनकी दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली अपील पर अंतिम निर्णय बाद में सुनाया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद लगभग दो दशक पुराने इस चर्चित हत्याकांड की एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि जमानत दिए जाने का अर्थ दोषमुक्त घोषित करना नहीं है। मामले में अंतिम फैसला अपील की विस्तृत सुनवाई पूरी होने के बाद ही होगा।
राम अवतार जग्गी की 4 जून 2003 को रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय यह घटना प्रदेश की सबसे चर्चित आपराधिक और राजनीतिक घटनाओं में शामिल हो गई थी। शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की, लेकिन मामले की गंभीरता और राजनीतिक महत्व को देखते हुए बाद में जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई।
सीबीआई की जांच में हत्या के पीछे कथित राजनीतिक साजिश की बात सामने आने का दावा किया गया था। जांच के आधार पर कई लोगों को आरोपी बनाया गया और लंबे समय तक न्यायालय में सुनवाई चलती रही। ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर कई आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इसके बाद विभिन्न आरोपियों ने उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।
हाल के वर्षों में इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक अमित जोगी को भी हत्या की साजिश का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि और सजा के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाते हुए उन्हें भी राहत दी थी। उस अपील पर भी अंतिम निर्णय अभी लंबित है।
अब दोषी शूटर चिमन सिंह को मिली अंतरिम जमानत ने इस बहुचर्चित मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। कानूनी जानकारों का कहना है कि अपील लंबित रहने के दौरान उच्चतम न्यायालय विशेष परिस्थितियों में अंतरिम जमानत दे सकता है, लेकिन इससे दोषसिद्धि स्वतः समाप्त नहीं होती। अंतिम निर्णय अदालत द्वारा सभी पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद ही दिया जाता है।
राम अवतार जग्गी हत्याकांड को छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित राजनीतिक आपराधिक मामलों में गिना जाता है। बीते दो दशकों में इस प्रकरण में कई कानूनी उतार-चढ़ाव आए हैं। लंबी न्यायिक प्रक्रिया, विभिन्न अदालतों के फैसले और लगातार दायर होती अपीलों के कारण यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना रहा है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपीलों की सुनवाई जारी है। ऐसे में मामले से जुड़े सभी आरोपियों की दोषसिद्धि और सजा को लेकर अंतिम स्थिति शीर्ष अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।



