रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्मार्ट बिजली मीटर, केंद्र सरकार की नीतियों और E20 पेट्रोल को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की कई योजनाओं का असर सीधे आम लोगों पर पड़ रहा है और जनता को राहत देने के बजाय नई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर बघेल ने कहा कि प्रदेशभर से उपभोक्ताओं की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। उनके अनुसार, स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद कई लोगों को बिजली बिल और तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य नहीं बल्कि वैकल्पिक व्यवस्था है, इसलिए इसे लोगों पर थोपना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से उपभोक्ताओं की शिकायतों का समयबद्ध समाधान करने और इस विषय पर स्पष्ट नीति सार्वजनिक करने की मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में समन्वय और जवाबदेही की कमी के कारण कई सरकारी योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रहा है। उनका कहना था कि केवल योजनाओं की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका पारदर्शी और ईमानदार क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है।
केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न विषयों पर टास्क फोर्स गठित किए जाने पर भी बघेल ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केवल टास्क फोर्स बनाने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि नीतियों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए और प्रशासनिक तंत्र को अधिक जवाबदेह बनाया जाए। उनके मुताबिक, जब तक व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, तब तक आम लोगों को वास्तविक राहत नहीं मिल सकेगी।
E20 पेट्रोल को लेकर भी उन्होंने केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए। बघेल ने दावा किया कि E20 ईंधन के इस्तेमाल के बाद कई वाहन चालकों ने गाड़ियों के माइलेज और प्रदर्शन को लेकर शिकायतें की हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस नीति के प्रभावों पर स्पष्ट जानकारी देते हुए जनता की आशंकाओं का समाधान करना चाहिए। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को इस विषय पर जवाबदेही दिखानी चाहिए।
भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार को जनहित से जुड़े मुद्दों पर केवल राजनीतिक बयान देने के बजाय व्यावहारिक और प्रभावी समाधान प्रस्तुत करने चाहिए। उन्होंने स्मार्ट मीटर, ईंधन नीति और प्रशासनिक व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता बताते हुए कहा कि जनता की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करना सरकार की जिम्मेदारी है।



