रायपुर। आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की प्रक्रिया इस वर्ष पहले की तुलना में अधिक विस्तृत हो गई है। आयकर विभाग ने रिटर्न फॉर्म में कई नए खुलासे (डिस्क्लोजर) अनिवार्य कर दिए हैं। अब करदाताओं को शादी-विवाह या रिश्तेदारों से मिले उपहार, सरकारी योजनाओं के तहत प्राप्त अनुदान, सोलर पैनल पर मिली सब्सिडी, इलेक्ट्रिक वाहन खरीद पर मिलने वाले लाभ सहित अन्य करमुक्त प्राप्तियों का विवरण भी आईटीआर में देना होगा।
कर विशेषज्ञों के अनुसार, इन जानकारियों को छिपाने या गलत विवरण देने पर भविष्य में आयकर जांच, जुर्माना और गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
इन करमुक्त प्राप्तियों का भी करना होगा खुलासा
नए नियमों के तहत अब केवल कर योग्य आय ही नहीं, बल्कि कई ऐसी प्राप्तियों का भी उल्लेख करना होगा, जिन पर आयकर नहीं लगता। इनमें शामिल हैं—
- शादी-विवाह या रिश्तेदारों से मिले उपहार
- सरकारी योजनाओं के तहत मिले अनुदान और वित्तीय सहायता
- सोलर पैनल पर मिली सब्सिडी
- इलेक्ट्रिक वाहन खरीद पर मिलने वाले प्रोत्साहन
- वसीयत से प्राप्त संपत्ति
- संयुक्त हिंदू परिवार (HUF) के बंटवारे से मिली संपत्ति
- कृषि भूमि की बिक्री से प्राप्त राशि
हालांकि इन पर उपलब्ध आयकर छूट पहले की तरह जारी रहेगी, लेकिन रिटर्न में इनका उल्लेख करना अब अनिवार्य होगा।
बैंक खातों का मिलान जरूरी
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी बैंक खातों का सावधानीपूर्वक मिलान करें। यदि खाते में किसी सरकारी योजना, सब्सिडी, अनुदान या अन्य करमुक्त राशि का भुगतान प्राप्त हुआ है, तो उसका सही विवरण आईटीआर में दर्ज करना आवश्यक है। उनका कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और करदाताओं की वित्तीय जानकारी को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
छत्तीसगढ़ में 16 लाख से अधिक करदाता
छत्तीसगढ़ में हर वर्ष करीब 16 लाख व्यक्ति, संस्थाएं और कंपनियां आयकर रिटर्न दाखिल करती हैं। कर विशेषज्ञों के मुताबिक इस वर्ष अब तक लगभग 65 प्रतिशत करदाता रिटर्न दाखिल कर चुके हैं, जबकि अंतिम तिथि तक यह आंकड़ा 90 से 95 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। सबसे अधिक रिटर्न नौकरीपेशा वर्ग की ओर से दाखिल किए जा रहे हैं।
आयकर विभाग ने आईटीआर-1 (सहज), आईटीआर-2, आईटीआर-3, आईटीआर-4 (सुगम), आईटीआर-5 और आईटीआर-7 की एक्सेल यूटिलिटी पोर्टल पर उपलब्ध करा दी है, जिससे करदाता समय पर अपना रिटर्न दाखिल कर सकें।
देरी करने पर लगेगा जुर्माना
कर विशेषज्ञों ने समय सीमा के भीतर आईटीआर दाखिल करने की सलाह दी है। निर्धारित तिथि के बाद रिटर्न दाखिल करने पर आयकर अधिनियम की धारा 234एफ के तहत विलंब शुल्क देना होगा। पांच लाख रुपये तक की कुल आय वाले करदाताओं पर 1,000 रुपये और इससे अधिक आय वालों पर 5,000 रुपये तक का विलंब शुल्क लगाया जा सकता है। यदि कर बकाया है, तो उस पर प्रति माह 1 प्रतिशत की दर से ब्याज भी देय होगा।



