रायपुर। कांग्रेस मुख्यालय घेराव के दौरान हुए बवाल के बाद दर्ज एफआईआर को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस ने कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है, जबकि भाजपा ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की कार्रवाई को उचित ठहराया है।
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कांग्रेस के प्रदेश संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस मुख्यालय पर हमला किया और पार्टी कार्यकर्ताओं पर पत्थरबाजी की। उनका कहना है कि पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर आंसू गैस के गोले भी छोड़े, लेकिन एफआईआर केवल कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि पार्टी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर राज्यपाल से मुलाकात करेगी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद दुबे ने भी सरकार पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता ट्रैक्टर में पत्थर भरकर लाए और कांग्रेस भवन की ओर फेंके। उनके अनुसार, जूते-चप्पल और पत्थरबाजी की घटनाओं के बावजूद केवल कांग्रेस नेताओं पर मामला दर्ज करना निष्पक्ष नहीं है। उन्होंने प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर सभी दोषियों पर समान कार्रवाई की मांग की।
वहीं उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आचरण लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के शांतिपूर्ण विरोध के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने डंडे लहराए और पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने का प्रयास किया।
अरुण साव ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है और हिंसा या उपद्रव करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार पुलिस और प्रशासन को धमकाने का प्रयास कर रही है, लेकिन कानून अपना काम करेगा।
उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रदेश में होने वाली कई आपराधिक घटनाओं में कांग्रेस से जुड़े लोगों के नाम सामने आते हैं। उन्होंने दावा किया कि सड़क से लेकर सदन तक कांग्रेस का व्यवहार जनता देख रही है और इसका जवाब जनता उचित समय पर देगी।



