रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल में मछली पालन के लिए जलाशयों और तालाबों के पट्टा आबंटन का मुद्दा चर्चा का विषय बना। कांग्रेस विधायक कुंवर सिंह निषाद ने सरकार से प्रदेश में लागू मछली पालन नीति, पात्र समितियों और पट्टा वितरण की प्रक्रिया से जुड़े सवाल पूछे। इस दौरान जांजगीर-चांपा जिले में पट्टा आबंटन में कथित अनियमितताओं का मामला भी सदन में उठाया गया।
आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने जवाब में बताया कि राज्य में वर्तमान में नवीन मछली पालन नीति-2022 लागू है और इसी के तहत पात्र मछुआ समितियों एवं समूहों को जलाशयों के पट्टे दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार पंजीकृत मछुआ समितियां और समूह ही पट्टा प्राप्त करने के पात्र हैं।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा नीति में एक ही परिवार के एक से अधिक सदस्यों के किसी समिति में शामिल होने को लेकर कोई अलग प्रावधान नहीं है। सभी आवेदनों का परीक्षण निर्धारित पात्रता और नियमों के आधार पर किया जाता है।
सदन में जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह विकासखंड के ग्राम सरहर और नगर पंचायत बलौदा में पट्टा आबंटन में कथित गड़बड़ी का मुद्दा भी उठा। इस पर मंत्री ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर स्तर पर जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने जांच पूरी करने के बाद अपनी रिपोर्ट में शिकायतों को निराधार बताया और किसी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई।
बहस के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने वर्तमान मछली पालन नीति में संशोधन की जरूरत बताते हुए कहा कि बदलते समय के अनुरूप नई नीति बनाई जानी चाहिए, जिससे पट्टा आबंटन प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी हो तथा वास्तविक मछुआ समुदाय को इसका लाभ मिल सके।
अजय चंद्राकर के सुझाव पर विधानसभा अध्यक्ष ने सरकार से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने और नई मछली पालन नीति तैयार करने की दिशा में आवश्यक पहल करने को कहा। इसके बाद सदन में इस विषय पर चर्चा समाप्त हो गई।
प्रदेश में बड़ी संख्या में मछुआ समितियां और स्व-सहायता समूह अपनी आजीविका के लिए जलाशयों के पट्टों पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि भविष्य में मछली पालन नीति में बदलाव होता है, तो इसका सीधा असर पट्टा आबंटन व्यवस्था और मछुआ समुदाय पर देखने को मिल सकता है।



