रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पूर्व अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने दावा किया है कि हाईकोर्ट का स्थगन आदेश अभी भी प्रभावी है और वह कानूनी रूप से अब भी आयोग की अध्यक्ष हैं। वहीं नवनियुक्त अध्यक्ष ममता साहू ने कहा है कि उन्होंने राज्य सरकार के आदेश के आधार पर विधिवत पदभार ग्रहण किया है।
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डॉ. किरणमयी नायक ने कहा कि वह कार्यालय जाकर किसी तरह का विवाद या टकराव नहीं चाहतीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 से यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है और अदालत का स्टे ऑर्डर आज भी लागू है। उन्होंने कहा कि ममता साहू की इसमें कोई गलती नहीं है, बल्कि अधिकारियों ने न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद कार्रवाई की।
उन्होंने आरोप लगाया कि केवल राजनीतिक आदेश के आधार पर नियुक्ति नहीं हो सकती, बल्कि इसके लिए विभागीय प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। डॉ. नायक ने कहा कि ममता साहू की नियुक्ति से संबंधित वैधानिक आदेश उन्हें अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका (कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट) दायर करने की बात कही।
इधर, ममता साहू ने डॉ. किरणमयी नायक के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह उनका सम्मान करती हैं, लेकिन उन्हें हाईकोर्ट से ऐसा कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है, जिसमें पदभार ग्रहण करने पर रोक लगाई गई हो। उन्होंने कहा कि उन्होंने राज्य सरकार के आदेश के तहत महिला आयोग अध्यक्ष का कार्यभार संभाला है।
ममता साहू ने कहा कि डॉ. किरणमयी नायक का कार्यकाल 12 जुलाई को पूरा हो चुका है और किसी भी पद की एक निश्चित समय-सीमा होती है। उन्होंने कहा कि कोई भी पद आजीवन नहीं होता और निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद कार्यमुक्त होना पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि वह पहले महिला आयोग की सदस्य रह चुकी हैं और नियुक्ति प्रक्रिया से पूरी तरह परिचित हैं। यदि किसी को उनकी नियुक्ति पर आपत्ति है तो वह न्यायालय जाने के लिए स्वतंत्र है। ममता साहू ने कहा कि अदालत से कोई नोटिस या समन मिलने पर वह कानूनी प्रक्रिया के तहत जवाब देंगी।



