RNN ब्यूरो
रायपुर/राजनांदगांव. रायपुर न्यूज़ नेटवर्क और RNN24 डिजिटल न्यूज चैनल की खबर सामने आते ही राज्य और राजनांदगांव जिला के सहकारिता विभाग में हड़कंप मच गया और कथित अवैध नियुक्तियों का मामला गरम हो गया। जिला प्रशासन को खबर के प्रसारित होने के महज कुछ घंटों के अंदर ही पूर्व में जारी इन दो विवादित नियुक्ति आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करना पड़ा।
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विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस पूरे मामले को विभागीय मंत्री केदार कश्यप ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए। और उपायुक्त सहकारिता एवं जिला सहकारिता कार्यालय, राजनांदगांव ने आज संशोधित आदेश जारी कर दोनों विवादास्पद नियुक्तियों को पूरी तरह निरस्त कर दिया।

आप को बता दें कि पत्र क्रमांक 361 के तहत 1 अप्रैल 2026 को शुभम कांडे को सेवा सहकारी समिति झिथराटोला से नवगठित समिति घुपसाल का प्रभारी प्रबंधक बनाए जाने का आदेश जारी किया गया था, जिसे आज उपायुक्त सहकारिता द्वारा जारी आदेश के अनुसार निरस्त कर दिया गया है। साथ ही 27 जनवरी 2026 को उनकी पदोन्नति संबंधी प्रस्ताव प्रक्रिया को भी पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। अब शुभम कांडे को पूर्ववती प्रभार झिथराटोला समिति में लिपिक सह कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर ही काम करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में वे झिथराटोला समिति में उनके लिपिक सह कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर किए जा रहे कार्यों का ही संपादन करेंगे।

इसी प्रकार पूर्ववर्ती जारी आदेशानुसार सौम्य कांडे जिसे लिपिक सह कम्प्यूटर आपरेटर के रिक्त पद पर समायोजित करने का निर्देश था उसे भी तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।

यह त्वरित कार्यवाही रायपुर न्यूज़ नेटवर्क और RNN24 डिजिटल न्यूज चैनल द्वारा उजागर की गई कथित अनियमितताओं और अवैध नियुक्तियों के सीधे असर के रूप में देखी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि इन नियुक्तियों में नियमों की जमकर धज्जियाँ उड़ाई गई थीं और नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि सहित प्रभाव का उपयोग किया गया था।

इस पूरे प्रकरण में सहकारिता विभाग से जुड़े के.एन. कांडे का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। उन पर प्रभाव और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह सिर्फ़ दो आदेश रद्द करने तक सीमित रहेगा या विभाग इन अनियमितताओं को पूरी तरह जड़ से समाप्त करने तक जाएगा?
इस घटनाक्रम ने सहकारिता विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया, पारदर्शिता और नियमों के पालन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं ? अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि विभाग आगे क्या कदम उठाता है—क्या पूरी जांच होगी, दोषियों पर कार्यवाही होगी और जवाबदेही तय की जाएगी या सिर्फ लिपापोती कर फ़ाइलों को बंद कर दिया जायेगा ?



