पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक )
रायपुर/छत्तीसगढ़ : राज्य के पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के बहुचर्चित शराब घोटाले में आज एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मामले के आरोपियों सौम्या चौरसिया और कथित तांत्रिक के.के. श्रीवास्तव को आज जेल से रिहा कर दिया गया। शीर्ष न्यायालय ने सशर्त जमानत देते हुए कहा था कि जिस दिन इस केस में चालान पेश होगा उस दिन इन्हें रिहाई मिलेगी। जबकि आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो का दावा है कि साजिश और अवैध लाभ के पुख्ता सबूत हैं।
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छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने आज बुधवार को रायपुर की स्पेशल कोर्ट में 1500 पन्नों का 8वां पूरक चालान पेश किया है। प्रस्तुत चालान में सबसे बड़ी बात यह थी कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया, कथित तांत्रिक के.के. श्रीवास्तव और कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय के एकाउंटेंट देवेन्द्र डड़सेना की भूमिका संदिग्ध ही नहीं बल्कि संलिप्तता के पूरे सबूत हैं। जिसकी जानकारी इस चालान के माध्यम से कोर्ट को दी गई है।
आप को बता दें कि जहां सौम्या चौरसिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव थी, वहीं देवेन्द्र डड़सेना कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय का पुराना एकाउंटेंट था। तांत्रिक श्रीवास्तव पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का करीबी होने का दावा करता है साथ ही वो भाजपा के पितृ पुरुषों में से एक सुंदर लाल पटवा से भी पुराने संबंधों का दावा कर रहा है।
देवेन्द्र डड़सेना के ऊपर आरोप है कि विभिन्न स्त्रोतों से मिली अवैध नकदी को लेने, सुरक्षित रखने और मिलें निर्देशों के अनुसार आगे भेजने का काम कर रहा था। उसने इस पूरे अपराधिक घटनाओं सहित षड्यंत्र में सक्रिय सहयोगी की भूमिका निभाते हुए पूरे सिंडिकेट के कैश फ्लो को भी संभाला था।
प्रस्तुत चालान के मुताबिक तांत्रिक श्रीवास्तव ने पूरे कैश नेटवर्क को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उसने कैश को उठाने और खपाने में बड़ी भूमिका निभाई। उसने गिरोह के पैसों का प्रबंधन, निवेश सहित बड़ी मात्रा में मिले कैश को एक जगह से दूसरी जगह भेजने में सक्रिय भूमिका निभाई है। उसने राज्य में अपने प्रभाव का भारी दुरूपयोग कर बड़ी मात्रा में अवैध धनार्जन किया।
शराब घोटाले में सौम्या चौरसिया की भूमिका सबसे संदिग्ध है, प्रस्तुत चालान के मुताबिक उसने शासकीय पद का सबसे ज्यादा दुरुपयोग किया और सिंडिकेट को संरक्षण और समन्वय करते हुए प्रशानिक सुविधाएं और इस पूरे नेटवर्क को समर्थन दिया। प्रस्तुत चालान में सौम्या चौरसिया की सक्रियता और संलिप्तता के साथ अवैध धनार्जन और षड्यंत्र के साथ राज्य सरकार को आर्थिक नुक़सान पहुंचाने में बड़ी भूमिका अदा की, जिसके प्रमाणित होने की बात कही गई है।
कोर्ट ने सौम्या चौरसिया और कथित तांत्रिक श्रीवास्तव दोनों को पासपोर्ट जमा कराने और हर सुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
पर महत्वपूर्ण सवाल यह है कि करीब एक महीने पहले सौम्या चौरसिया को ऊपरी अदालत से जमानत मिली थी और उन्होंने ने अपने आदेश में कहा था कि जिस दिन इस मामले में चालान पेश किया जाएगा, उसी दिन उनकी रिहाई की जायेगी। इसके मायने क्या हो सकतें हैं इस पर राजनैतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मची हुई है, क्या रिहाई पुर्व नियोजित थी ?



