रायपुर। राजधानी में मारपीट, झगड़े और सामान्य अपराधों पर लगाम लगाने के लिए रायपुर पुलिस अब सख्त रुख अपनाते हुए आरोपियों को थाने से छोड़ने के बजाय सीधे कोर्ट में पेश कर रही है। इससे आरोपियों को या तो जेल भेजा जा रहा है या फिर उनका बाउंड ओवर (बीओ) कराया जा रहा है। पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद इस तरह की कार्रवाइयों में काफी तेजी आई है।
पिछले 45 दिनों का आंकड़ा
- कुल 658 लोगों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई।
- इनमें से 316 लोगों को बाउंड ओवर किया गया।
- एसीपी कोर्ट में पेश 828 आरोपियों में से 330 को बाउंड ओवर।
- डीसीपी कोर्ट में पेश 10 आरोपियों में से 2 पर बाउंड ओवर की कार्रवाई हुई।
बाउंड ओवर क्या है?
बाउंड ओवर एक प्रतिबंधात्मक कानूनी कार्रवाई है, जिसमें व्यक्ति से एक निश्चित अवधि तक शांति बनाए रखने का लिखित आश्वासन लिया जाता है। शर्तों का उल्लंघन करने पर जुर्माना या जेल हो सकती है।
आरोपी को संपत्ति या नकद राशि जमा करनी पड़ती है
अवधि आमतौर पर 6 महीने से 3 साल तक होती है
बाउंड की राशि
- सामान्य मामलों में : 10 हजार से 50 हजार रुपये
- गंभीर मामलों में : 1 लाख से 5 लाख रुपये तक
कारण और असर
पहले यह प्रक्रिया एसडीएम कोर्ट के माध्यम से होती थी, लेकिन अब पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था में पुलिस को कार्यपालक मजिस्ट्रेट के अधिकार मिल गए हैं। इससे कार्रवाई तेज और प्रभावी हो गई है। पुलिस कमिश्नर का दावा है कि इस सख्ती का असर दिखने लगा है। हाल ही में होली के दौरान घटनाएं काफी कम हुईं और कोई हत्या दर्ज नहीं हुई। रायपुर ग्रामीण क्षेत्र में भी ऐसी प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों को बढ़ावा दिया जा रहा है।



