कांकेर। लंबे समय तक नक्सलवाद की छाया में दबे कोयलीबेड़ा इलाके के ग्रामीण अब अपनी आवाज़ उठाने लगे हैं। सोमवार को कोयलीबेड़ा ब्लॉक के 18 ग्राम पंचायत के 68 गांवों के लोगों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंक और प्रशासनिक सुविधाओं की मांग को लेकर चक्काजाम और धरना प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों ने बताया कि कोयलीबेड़ा ब्लॉक मुख्यालय होने के बावजूद सभी सरकारी अधिकारी 50 किलोमीटर दूर पखांजूर में कार्यालय चला रहे हैं, जिससे गांव के लोग लंबी दूरी तय कर केवल मामूली काम के लिए भी मजबूर हैं। लोगों ने कहा कि वर्षों से उनकी मांगें केवल कागजों तक ही सीमित रह गई हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में भी हालात खराब हैं। स्कूल जर्जर हैं और महाविद्यालय की कमी के कारण बारहवीं के बाद बच्चों को आगे पढ़ाई के लिए 50 किलोमीटर दूर भानुप्रतापपुर जाना पड़ता है। आर्थिक तंगी के कारण कई बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे हैं।
स्वास्थ्य सुविधाएं भी बेहद सीमित हैं। एक ही एम्बुलेंस, महिला डॉक्टर और अन्य चिकित्सकों की कमी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैंकिंग सुविधाओं की कमी से भी ग्रामीण परेशान हैं। किसानों को अपनी उपज का पैसा सप्ताह में केवल एक दिन, बुधवार को भानुप्रतापपुर से मिलता है, जिससे कई बार किसान बिना पैसे के लौट जाते हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी जायज मांगों को जल्द नहीं सुना गया, तो वे आने वाले समय में उग्र आंदोलन कर सकते हैं।




