पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक )
रायपुर/छत्तीसगढ़ : भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने मार्च 2023 को समाप्त नवीनतम ऑडिट रिपोर्ट संविधान के अनुच्छेद 151 के तहत रिपोर्ट संख्या 5, 16 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रस्तुत की है।
ऑडिट रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ राज्य में कांग्रेस के शासनकाल 2018-23 में राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की वित्तीय स्थिति, कॉरपोरेट गवर्नेंस मानकों और क्रियान्वयन क्षमता पर गंभीर त्रुटि पाई गई। रिपोर्ट में इस पर चिंता और गंभीर आपत्तियां जताई गई है।
राज्य सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के विश्लेषण से पता चला कि 31 मार्च 2023 तक छत्तीसगढ़ में कुल 28 राज्य सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम थे, जिनमें 27 सरकारी कंपनियां और एक वैधानिक निगम शामिल था। इनमें से 26 उपक्रम कार्यरत थे, जबकि दो निष्क्रिय थे। कार्यरत उपक्रमों में से चार विद्युत क्षेत्र से संबंधित थे। 30 सितंबर 2023 तक 25 राज्य सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के 47 खाते लंबित पाए गए, जिनमें कुछ मामलों में छह वर्ष तक की देरी थी।
कैग रिपोर्ट कांग्रेस शासन काल – 2018-23 – महत्वपूर्ण बिंदु
1 – सार्वजनिक उपक्रमों को ₹1,143.10 करोड़ का घाटा हुआ।
2 – छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड और छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन लिमिटेड सहित पांच प्रमुख उपक्रमों का संचयी घाटा ₹10,252.86 करोड़ तक पहुंच गया।
3 – त्रुटियों के कारण लाभ में ₹1,194.79 करोड़ का नुक़सान तथा परिसंपत्तियों और देनदारियों में ₹1,231.80 करोड़ की बढ़त।
4 – इन उपक्रमों में इक्विटी और दीर्घकालिक ऋण के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार का कुल निवेश ₹7,579.09 करोड़ रहा, जबकि दीर्घकालिक ऋणों की बकाया राशि ₹846.06 करोड़ रही।
5 – राज्य सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों का संयुक्त वार्षिक कारोबार ₹42,172.73 करोड़ रहा, जो छत्तीसगढ़ के सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 9.22 प्रतिशत है।
आडिट रिपोर्ट में कॉरपोरेट गवर्नेंस में लगातार चूक को भी उजागर किया गया है। 16 राज्य सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों ने वर्ष भर में निदेशक मंडल की अनिवार्य चार बैठकें आयोजित नहीं की गई और 12 में से केवल एक उपक्रम में निर्धारित संख्या में स्वतंत्र निदेशक थे। आठ पात्र उपक्रमों में से केवल चार में पूर्णकालिक प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक नियुक्त किए गए, जबकि 12 में से केवल दो उपक्रमों में ऑडिट समिति का गठन किया गया। केवल एक उपक्रम में नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति गठित थी और छह पात्र उपक्रमों में से किसी ने भी शिकायत निवारण हेतु सतर्कता तंत्र स्थापित नहीं किया। रिपोर्ट में राज्य सरकार को सिफारिश की गई है कि वह घाटे में चल रहे और निष्क्रिय उपक्रमों की कार्यप्रणाली की त्वरित समीक्षा करे, खातों के अंतिम रूप देने के लिए समय-सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित करे, कॉरपोरेट गवर्नेंस अनुपालन को मजबूत करे
कैग रिपोर्ट 2 – छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार 2018-23 के दौरान राज्य के स्मार्ट सिटी मिशन में देरी और फंड में हेरफेर.
₹9,627.70 करोड़ की स्वीकृत परियोजना, ₹2,644.44 करोड़ के 476 कार्यादेश, कुल अनुमानित लागत का 27 प्रतिशत, मार्च 2023 तक केवल 62 प्रतिशत कार्य पूर्ण,वास्तविक व्यय ₹1,213.12 करोड़।



