भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी को लेकर इस बार तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पंचांग के अनुसार उदया तिथि के आधार पर अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि 6 सितंबर की शाम करीब 7:29 बजे शुरू हुई और 7 सितंबर की शाम करीब 5:03 से 5:05 बजे के आसपास समाप्त होगी। चूंकि 7 सितंबर को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए इसी दिन व्रत रखना शास्त्रसम्मत माना गया है।
भद्रा और पंचक का नहीं रहेगा प्रभाव
अजा एकादशी के दिन भद्रा और पंचक का प्रभाव नहीं रहेगा। हालांकि राहुकाल में भगवान विष्णु की पूजा अथवा अन्य शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी गई है। 7 सितंबर को राहुकाल सुबह 8:54 बजे से 10:32 बजे तक रहेगा। ऐसे में इस अवधि को छोड़कर पूजा-अर्चना की जा सकती है।
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
अजा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं—
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:49 से 6:32 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 6:10 से 7:16 बजे तक
- अमृत काल: दोपहर 12:29 से 1:59 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 1:22 से 2:14 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 3:59 से शाम 4:51 बजे तक
- सर्वार्थ सिद्धि योग: दोपहर 2:44 बजे से अगले दिन सुबह 7:17 बजे तक
8 सितंबर को होगा व्रत का पारण
अजा एकादशी व्रत का पारण 8 सितंबर 2026, मंगलवार को द्वादशी तिथि में किया जाएगा। पंचांग गणना के अनुसार पारण का समय सुबह 6:02 बजे से 8:33 बजे तक बताया गया है। हालांकि अलग-अलग स्थानों के अनुसार पारण के समय में कुछ अंतर हो सकता है।
भगवान विष्णु को समर्पित है अजा एकादशी
धार्मिक मान्यता के अनुसार अजा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन उपवास रखकर विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। मान्यता है कि अजा एकादशी का व्रत करने से पापों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक ग्रंथों में भी इस व्रत को विशेष फलदायी बताया गया है।




