रायपुर। छत्तीसगढ़ से अलग बस्तर राज्य बनाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है और अब क्षेत्र विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने अलग बस्तर राज्य की मांग को विकास विरोधी सोच बताया।
दो दिवसीय दिल्ली दौरे से रायपुर लौटे मुख्यमंत्री साय ने एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान जल संरक्षण और बस्तर से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। जन्माष्टमी के मौके पर उनके स्वागत के लिए बड़ी संख्या में समर्थक भी एयरपोर्ट पहुंचे।
जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ के प्रदर्शन का जिक्र
मुख्यमंत्री ने जल शक्ति मंत्रालय की बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान’ में छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के पांच जिले जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के टॉप-10 जिलों में शामिल हैं।
सीएम साय ने कहा कि बारिश की हर बूंद को सहेजना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्याप्त जल सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने राज्यों की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करने और बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’ शुरू करने का सुझाव भी दिया।
बस्तर राज्य की मांग पर क्या बोले साय?
अलग बस्तर राज्य की मांग को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सली लंबे समय तक बस्तर में सड़क, स्कूल और विकास के कामों में बाधा डालते रहे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की इच्छाशक्ति और सुरक्षा जवानों के साहस का उल्लेख करते हुए कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ ऐसी सफलता मिली है, जिसे कभी असंभव माना जाता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर को अलग राज्य बनाने की मांग करने वाले विकास विरोधी बातें कर रहे हैं। उन्होंने ऐसी मांग करने वालों को छत्तीसगढ़ की जनता के विरोधी करार दिया।




