Janmashtami 2026 : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व नजदीक आते ही भक्तों के बीच इसकी सही तारीख और पूजा के शुभ मुहूर्त को लेकर असमंजस बढ़ गया है। इस बार जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। हालांकि, कुछ वैष्णव और मंदिर परंपराओं में 5 सितंबर को भी जन्माष्टमी का पालन किया जा सकता है। ऐसे में व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्थानीय पंचांग और मंदिर की परंपरा देखना महत्वपूर्ण है।
यह भी पढ़े :- पोटाकेबिन में 47 छात्राएं बीमार, बुखार-उल्टी दस्त की शिकायत; एक छात्रा गंभीर
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी पर निशीथ काल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का विशेष पूजन किया जाता है।
4 सितंबर की रात होगी जन्माष्टमी की मुख्य पूजा
पंचांग के अनुसार इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में माना जाता है, इसलिए 4 सितंबर की रात ही जन्मोत्सव की मुख्य पूजा होगी।
मथुरा के लिए पंचांग गणना के अनुसार निशीथ पूजा का समय रात 11:56 बजे से 5 सितंबर की रात 12:41 बजे तक बताया गया है। इसी दौरान भक्त भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक, पूजन और आरती कर सकते हैं।
रोहिणी नक्षत्र का भी रहेगा विशेष महत्व
जन्माष्टमी की गणना में अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र को भी विशेष महत्व दिया जाता है। पंचांग के अनुसार 4 सितंबर की रात करीब 12:29 बजे से 5 सितंबर की रात 11:04 बजे तक रोहिणी नक्षत्र रहने की जानकारी दी गई है।
मथुरा-वृंदावन में धूमधाम से मनेगी जन्माष्टमी
भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में जन्माष्टमी का पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। मंदिरों में दिनभर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के समय विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक, आरती और जन्मोत्सव की झांकी निकाली जाती है।
वहीं वृंदावन और ब्रज क्षेत्र में भी जन्माष्टमी को लेकर विशेष तैयारियां रहती हैं। मंदिरों में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है और रात में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन, भजन और कीर्तन के लिए पहुंचते हैं।
5 सितंबर को मनाया जाएगा नंदोत्सव
जन्माष्टमी के अगले दिन 5 सितंबर 2026 को नंदोत्सव मनाया जाएगा। ब्रज क्षेत्र में नंदोत्सव की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण के जन्म की खुशी में नंद बाबा के घर उत्सव मनाया गया था, इसी की स्मृति में नंदोत्सव मनाया जाता है।
कब होगा व्रत का पारण?
जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए पारण का समय भी महत्वपूर्ण होता है। पंचांग परंपरा के अनुसार 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद व्रत पारण किया जा सकता है। मथुरा के लिए पारण का समय सुबह करीब 6 बजे के बाद बताया गया है।
हालांकि, कुछ संप्रदायों और स्थानीय परंपराओं में भगवान श्रीकृष्ण के मध्यरात्रि जन्म के बाद पूजा संपन्न करके व्रत खोलने की परंपरा भी है। इसलिए व्रत पारण के लिए अपनी धार्मिक परंपरा और स्थानीय पंचांग का पालन करना उचित रहेगा।
जन्माष्टमी पर कैसे करें पूजा?
जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करके भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा का संकल्प लिया जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं। रात में निशीथ काल के दौरान लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक किया जाता है।
इसके बाद भगवान को नए वस्त्र पहनाकर माखन-मिश्री, फल और अन्य सात्विक भोग अर्पित किया जाता है। मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के समय शंख बजाकर आरती की जाती है। कई स्थानों पर लड्डू गोपाल को पालने में झुलाने की भी परंपरा है।
Janmashtami 2026 की जरूरी तारीखें
- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: 4 सितंबर 2026, शुक्रवार
- निशीथ पूजा: रात 11:56 बजे से 12:41 बजे तक
- रोहिणी नक्षत्र: 4 सितंबर की रात से 5 सितंबर की रात तक
- मथुरा में जन्मोत्सव: 4 सितंबर की मध्यरात्रि
- व्रत पारण: 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद
- नंदोत्सव: 5 सितंबर 2026
नोट: जन्माष्टमी की तारीख और व्रत-पारण का समय अलग-अलग संप्रदायों तथा स्थानीय पंचांग की गणना के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। पूजा और व्रत के लिए अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग या संबंधित मंदिर की परंपरा को प्राथमिकता दें।




