बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित स्नेक बाइट मुआवजा घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सिम्स की पूर्व चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी समेत एसडीएम और तहसीलदार कार्यालय के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर सर्पदंश से मौत की फर्जी रिपोर्ट तैयार कर करोड़ों रुपये का सरकारी मुआवजा दिलाने का आरोप है। पुलिस अब तक 16 संदिग्ध मामलों की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
जांच में सामने आया है कि पिछले तीन वर्षों में जशपुर जिले में सर्पदंश से 96 मौतें दर्ज हुईं, जबकि अकेले बिलासपुर जिले में 431 मौतों को स्नेक बाइट बताकर 17 करोड़ 24 लाख रुपये का मुआवजा जारी किया गया। आंकड़ों में इस बड़े अंतर ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया।
यह मामला विधानसभा तक भी पहुंचा था। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से इस मुद्दे को उठाया, जिसके बाद सदन में जमकर हंगामा हुआ। इसके बाद राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने उच्च स्तरीय जांच के निर्देश देते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था।
पुलिस जांच में सामने आया कि वर्ष 2025 में बिल्हा थाना क्षेत्र में जहर खाने से हुई एक मौत को सर्पदंश से मौत बताकर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की गई थी। इस मामले में डॉ. प्रियंका सोनी, मृतक के परिजन और एक वकील को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
ताजा कार्रवाई में एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक, गरीब राम बिंझवार और तहसीलदार कार्यालय के क्लर्क हरिशंकर राठौर को भी गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन कर्मचारियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने और मुआवजा स्वीकृत कराने में अहम भूमिका निभाई।
प्रदेश सरकार के नियमों के तहत सर्पदंश से मौत होने पर मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसी प्रावधान का दुरुपयोग करते हुए सामान्य मौतों को स्नेक बाइट का मामला बताकर सरकारी खजाने से लाखों रुपये की राशि निकाली गई।
जांच में महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की मौत के मामलों को भी संदिग्ध पाया गया है। इन प्रकरणों में दो मृतकों के परिजन और एक वकील को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस की जांच अब सिम्स के 4 से 5 अन्य डॉक्टरों तक पहुंच चुकी है। फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने के संदेह में कई डॉक्टरों से पूछताछ की जा चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस बहुचर्चित घोटाले में जल्द ही और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



