बिलासपुर। नेशनल हाईवे पर खड़े भारी वाहनों से डीजल चोरी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के संदेहियों को बिना उच्चाधिकारियों की अनुमति के छोड़ने का मामला सामने आया है। इस गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रजनेश सिंह ने कोनी थाना में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) उमेश उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही मामले की प्रारंभिक जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने और पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठने के बाद यह मामला एसएसपी के संज्ञान में आया था। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएसपी (कोतवाली) गगन कुमार को सात दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

ढाबे के पास खड़ी ट्रेलर से हुई थी चोरी
पुलिस के अनुसार, बीती 11 जुलाई को एक ट्रेलर मालिक ने कोनी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि रायपुर से सिंगरौली (मध्य प्रदेश) जा रहे उसके ट्रेलर को गतौरी स्थित बाबी ढाबा के पास खड़ा किया गया था। इस दौरान अज्ञात चोरों ने वाहन की टंकी से करीब 150 लीटर डीजल पार कर दिया। शिकायत पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर तफ्तीश शुरू की। 12 जुलाई को मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ लोग दो स्कॉर्पियो वाहनों में चोरी का डीजल बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहे हैं, जिसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर दबिश दी।
200 लीटर डीजल और दो स्कॉर्पियो जब्त
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि तीन अन्य भागने में सफल रहे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 200 लीटर चोरी का डीजल, पाइप, लोहे की छड़ और दो स्कॉर्पियो वाहन (क्रमांक MP-18 ZG-2645 और CG-10 BK-0938) जब्त किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शिवप्रसाद उर्फ छोटू लोनिया (32, निवासी अनूपपुर, म.प्र.) और भानु प्रसाद लोनिया (37, निवासी बरपाली भदौरियाखार, बिलासपुर) के रूप में हुई है।
वायरल वीडियो से खुली पोल, लेनदेन के आरोप
कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए। इनमें पुलिस ग्राम पंचायत सेमरताल के भदौरियाखार में दबिश देकर बैसाखू लोनिया, राजू लोनिया, राजेश लोनिया और भानु लोनिया सहित अन्य लोगों को हथकड़ी लगाकर थाने ले जाती दिख रही है।
आरोप है कि अगले ही दिन सुबह बैसाखू, राजेश, राजू और एक महिला को थाने से छोड़ दिया गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में इस कार्रवाई के एवज में पुलिस पर सांठगांठ और लेनदेन के आरोप भी लगाए जा रहे हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
अनुशासनहीनता पर एसएसपी की गाज
प्राथमिक जांच में सामने आया कि पुलिस ने कुल पांच संदिग्धों को हिरासत में लिया था, लेकिन रिकॉर्ड में केवल दो की ही गिरफ्तारी दिखाई गई। आरोप है कि विवेचक एएसआई उमेश उपाध्याय ने वरिष्ठ अधिकारियों को अंधेरे में रखकर तीन संदिग्धों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के छोड़ दिया। इसे गंभीर अनुशासनहीनता और संदिग्ध आचरण मानते हुए एसएसपी ने एएसआई को सस्पेंड कर दिया है। अब सभी की नजरें सीएसपी कोतवाली की सात दिनों में आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।



