हिंदू धर्म में ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर को साक्षात बैकुंठ धाम माना गया है। हर साल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को निकलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इस वर्ष भी महाप्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की यह रथ यात्रा बेहद अनूठे और भव्य रूप में शुरू होने जा रही है।
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इस प्राचीन मंदिर और रथ यात्रा से जुड़े कई ऐसे चमत्कार और रहस्य हैं, जिनका जवाब आज के आधुनिक विज्ञान और तकनीक के पास भी नहीं है। आइए जानते हैं पुरी धाम के उन ६ अनसुने रहस्यों के बारे में, जो वैज्ञानिकों को भी हैरान करते हैं:
1. क्यों अधूरी हैं भगवान की मूर्तियां? इसके पीछे की भावुक कथा
जगन्नाथ मंदिर में स्थापित मूर्तियां अन्य हिंदू मंदिरों की तरह पत्थर या धातु की नहीं, बल्कि नीम की लकड़ी (दारु) से बनी हैं और ये अधूरी हैं। इनके हाथ-पैर नहीं हैं। पौराणिक कथा के मुताबिक, राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान विष्णु की मूर्ति बनाने के लिए देवताओं के शिल्पी विश्वकर्मा जी से प्रार्थना की थी। विश्वकर्मा जी ने एक वृद्ध मूर्तिकार के रूप में प्रकट होकर शर्त रखी कि वे बंद कमरे में मूर्ति बनाएंगे और जब तक मूर्तियां पूरी नहीं हो जातीं, कोई दरवाजा नहीं खोलेगा।
कई दिनों तक कमरे से कोई आवाज नहीं आने पर रानी गुंडिचा की चिंता बढ़ गई। राजा ने रानी के कहने पर दरवाजा खुलवा दिया, जिससे शर्त टूट गई और विश्वकर्मा जी अंतर्ध्यान हो गए। तब आकाशवाणी हुई कि भगवान इसी रूप में धरती पर रहना चाहते हैं। तब से आज तक भगवान जगन्नाथ इसी अधूरे लेकिन अत्यंत मनमोहक रूप में पूजे जाते हैं।
2. हवा के विपरीत लहराता है ध्वज
यह एक ऐसा भौतिक विज्ञान का नियम है जिसे जगन्नाथ मंदिर पूरी तरह चुनौती देता है। आमतौर पर हवा जिस दिशा में चलती है, कपड़ा या झंडा उसी दिशा में लहराता है। लेकिन जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगा लाल रंग का ध्वज हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। इस ४५ मंजिला ऊंची इमारत के शिखर पर स्थित ध्वज को हर दिन एक पुजारी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के उल्टा चढ़कर बदलता है। मान्यता है कि अगर एक दिन भी ध्वज नहीं बदला गया, तो मंदिर अगले १८ सालों के लिए बंद हो जाएगा।
3. हर दिशा से सीधा दिखता है सुदर्शन चक्र
मंदिर के शिखर पर अष्टधातु से बना एक भव्य सुदर्शन चक्र स्थापित है, जिसे ‘नीलचक्र’ भी कहा जाता है। इसकी बनावट इतनी चमत्कारिक है कि आप पुरी के किसी भी कोने में खड़े होकर जब इस चक्र को देखेंगे, तो इसका मुख हमेशा आपकी तरफ ही दिखाई देगा।
4. सिंहद्वार के अंदर कदम रखते ही गायब होती है समुद्र की आवाज
पुरी का मंदिर समुद्र के बिल्कुल किनारे स्थित है, इसलिए बाहर लहरों की बहुत तेज आवाज आती है। लेकिन जैसे ही आप मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार यानी सिंहद्वार के अंदर अपना पहला कदम रखते हैं, समुद्र की लहरों की आवाज पूरी तरह से गायब हो जाती है और अद्भुत शांति महसूस होती है। सिंहद्वार से एक कदम बाहर आते ही लहरों का शोर फिर से सुनाई देने लगता है।
5. मंदिर के ऊपर से नहीं उड़ते पक्षी और विमान
आज के समय में गगनचुंबी इमारतों या एयरपोर्ट्स के पास से पक्षियों और विमानों का गुजरना आम बात है। लेकिन जगन्नाथ मंदिर के ऊपर से आज तक न तो कोई पक्षी उड़ता हुआ देखा गया है और न ही कोई हवाई जहाज या हेलिकॉप्टर इसके ऊपर से गुजरता है। यह मंदिर प्राकृतिक रूप से एक ‘नो-फ्लाई जोन’ बना हुआ है।
6. दुनिया की सबसे बड़ी रसोई: ऊपर वाले बर्तन का खाना पकता है सबसे पहले
जगन्नाथ मंदिर की रसोई में भगवान का महाप्रसाद बनाने के लिए मिट्टी के ७ बर्तनों को एक के ऊपर एक रखा जाता है। चूल्हे पर रखे इन बर्तनों में से सबसे ऊपर वाले बर्तन का खाना सबसे पहले पकता है, और सबसे अंत में सबसे नीचे वाले बर्तन का खाना पकता है जो सीधे आग के संपर्क में होता है। इसके अलावा, मंदिर में हर दिन हजारों-लाखों भक्त आते हैं, लेकिन यहां का प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता और मंदिर बंद होने के समय तक अन्न का एक भी दाना व्यर्थ नहीं जाता।



