रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे को लेकर सदन में जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक पोस्टर लेकर विधानसभा पहुंचे और इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस, नारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के चलते सदन का माहौल गरमा गया तथा कुछ समय के लिए कार्यवाही भी प्रभावित हुई।
यह भी पढ़े :- विधानसभा में गूंजा राजस्व गांवों का मुद्दा! 375 गांवों में अब तक शुरू नहीं हुआ सर्वे
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि वे यह मुद्दा किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि प्रदेश के करोड़ों रामभक्तों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए उठा रहे हैं। उनका कहना था कि देशभर के श्रद्धालुओं ने विश्वास और आस्था के साथ राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया था, इसलिए यदि उस राशि के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो इस पर खुली चर्चा होना आवश्यक है।
कांग्रेस विधायकों ने इस विषय पर स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से चर्चा कराने की मांग रखी। विपक्ष का तर्क था कि यह मामला जनभावनाओं और पारदर्शिता से जुड़ा है, इसलिए विधानसभा में इस पर चर्चा होनी चाहिए। हालांकि सत्ता पक्ष ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि यह विषय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
संसदीय कार्य मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ा मामला विधानसभा के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उन्होंने कहा कि राज्य विधानसभा केवल उन्हीं विषयों पर चर्चा कर सकती है जो राज्य सरकार के प्रशासनिक या विधायी दायरे में आते हों। ऐसे में इस विषय पर स्थगन प्रस्ताव स्वीकार करना नियमों के अनुरूप नहीं होगा।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि प्रस्तुत स्थगन प्रस्ताव राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से संबंधित नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। अध्यक्ष के इस निर्णय के बाद कांग्रेस विधायक अपनी सीटों से उठकर विरोध जताने लगे और सदन में नारेबाजी शुरू हो गई।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस दौरान कहा कि विपक्ष को जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों ने भी राम मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धा के साथ योगदान दिया था, इसलिए चंदे के उपयोग को लेकर उठ रहे सवालों पर चर्चा होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
दूसरी ओर, सत्ता पक्ष ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि विधानसभा का समय केवल राज्य सरकार से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए है और नियमों से बाहर जाकर किसी विषय पर बहस नहीं कराई जा सकती।
इधर, मानसून सत्र के दौरान राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने के संकेत हैं। कांग्रेस ने 14 जुलाई को राज्य सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की घोषणा की है। हालांकि विधानसभा में भाजपा के बहुमत को देखते हुए प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन विपक्ष इसे सरकार को विभिन्न जनहित और प्रशासनिक मुद्दों पर घेरने के अवसर के रूप में देख रहा है।



