बचपन से ही अधिकांश लोगों ने अपने बड़े-बुजुर्गों से यह बात सुनी है कि यदि बिल्ली रास्ता काट जाए तो कुछ देर रुककर ही आगे बढ़ना चाहिए। शकुन शास्त्र में भी बिल्ली का रास्ता काटना शुभ-अशुभ संकेतों से जुड़ा माना गया है। हालांकि, इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इन्हें धार्मिक एवं लोक परंपराओं के संदर्भ में ही देखा जाता है।
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शकुन शास्त्र के अनुसार, विशेष रूप से काली बिल्ली का रास्ता काटना किसी कार्य में बाधा, विलंब या परेशानी का संकेत माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में बिल्ली को राहु ग्रह से संबंधित जीव माना गया है। राहु को रुकावट, भ्रम और अप्रत्याशित घटनाओं का कारक माना जाता है। इसी वजह से ऐसी धारणा प्रचलित है कि बिल्ली के रास्ता काटने से कार्य में व्यवधान आ सकता है।
कुछ मान्यताओं के अनुसार यदि बिल्ली बाईं ओर से दाईं ओर रास्ता काटे तो इसे अधिक अशुभ माना जाता है। वहीं, किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए निकलते समय बिल्ली के रास्ता काटने को कार्य में देरी या असफलता का संकेत भी माना जाता है।
बिल्ली का रोना या लड़ना भी माना जाता है संकेत
शकुन शास्त्र में केवल रास्ता काटना ही नहीं, बल्कि घर के आसपास बिल्लियों का आपस में लड़ना या उनके रोने की आवाज सुनाई देना भी शुभ नहीं माना जाता। लोक मान्यताओं के अनुसार यह घर में कलह या आर्थिक नुकसान का संकेत हो सकता है।
बिल्ली के छींकने को भी माना जाता है अपशकुन
मान्यता है कि यदि यात्रा के दौरान बिल्ली सामने आकर छींक दे, तो इसे भी अशुभ संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में कुछ देर रुककर फिर यात्रा शुरू करने की सलाह दी जाती है।
यदि बिल्ली रास्ता काट दे तो क्या करें?
लोक परंपराओं में इससे जुड़े कुछ सरल उपाय बताए गए हैं—
- यदि बिल्ली रास्ता काट दे तो एक-दो मिनट रुककर आगे बढ़ें।
- मान्यता है कि यदि आपके बाद कोई अन्य व्यक्ति या वाहन उस रास्ते से गुजर जाए तो दोष समाप्त हो जाता है।
- यदि संभव हो तो थोड़ा पानी पी लें या जमीन पर जल का छिड़काव कर लें।
- अपने इष्ट देव का स्मरण करें या हनुमान चालीसा की एक पंक्ति का पाठ करें। इससे मन का भय और नकारात्मकता कम होती है।
नोट: ये सभी बातें धार्मिक और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इन्हें आस्था और परंपरा के दृष्टिकोण से ही देखा जाना चाहिए।



