मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी। महतारी वंदन योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिले के मुढ़ीपार निवासी त्रिलोक साहू ने खुद को महिला बताकर योजना का लाभ लिया और करीब एक साल तक हर महीने 1,000 रुपये अपने खाते में प्राप्त करता रहा। KYC प्रक्रिया के दौरान मामले का खुलासा होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। कलेक्टर इंद्रजीत चटवाल ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
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जानकारी के अनुसार, त्रिलोक साहू कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) का संचालक है। महतारी वंदन योजना का पोर्टल शुरू होते ही उसने स्वयं को महिला दर्शाते हुए आवेदन कर दिया। आवेदन स्वीकृत होने के बाद उसके खाते में लगातार 12 महीनों तक प्रति माह 1,000 रुपये की राशि जमा होती रही। इस तरह उसने कुल 12 हजार रुपये का लाभ प्राप्त किया।
सबसे हैरानी की बात यह है कि आवेदन पत्र में हितग्राही का नाम और पति का नाम दोनों जगह ‘त्रिलोक साहू’ दर्ज था। इसके बावजूद आवेदन पर किसी स्तर पर आपत्ति नहीं की गई और उसे सत्यापित कर दिया गया।
आंगनबाड़ी और सुपरवाइजर की भूमिका पर सवाल
मामला खैरागढ़ परियोजना के मुढ़ीपार सेक्टर से जुड़ा है। रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सुपरवाइजर दोनों ने आवेदन की जांच कर उसे “सत्यापित” कर दिया। वर्तमान में पोर्टल पर आवेदन की स्थिति “परमानेंट होल्ड” तथा “लाभ त्याग अनुरोध स्वीकृत” दर्शाई जा रही है।
कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
मामला सामने आने के बाद कलेक्टर इंद्रजीत चटवाल ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए खैरागढ़ परियोजना अधिकारी रंजना श्रीवास्तव को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन के अनुसार, लाभार्थी से अब तक 10 हजार रुपये की वसूली की जा चुकी है। फिलहाल त्रिलोक साहू के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाइजर और मैदानी अमले से पूछताछ की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना में सामने आई इस गड़बड़ी ने सत्यापन प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



