बिलासपुर, 08 जुलाई। CIMS Bilaspur : छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल CIMS (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) की व्यवस्थाओं को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के शपथ पत्र पर कड़ी नाराज़गी जताई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने शपथ पत्र की भाषा और प्रस्तुति पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की कि दस्तावेज देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया हो।
‘दस्तावेज सुंदर है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग’
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि शपथ पत्र में कई बातें बार-बार दोहराई गई हैं। दस्तावेज व्यवस्थित जरूर दिखता है, लेकिन इससे अस्पताल की वास्तविक स्थिति नहीं बदल जाती। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि अस्पताल की व्यवस्था वास्तव में बेहतर होती, तो मामला हाईकोर्ट तक पहुंचता ही नहीं।
कोर्ट ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि अदालत के सामने वास्तविक स्थिति रखी जाए, न कि केवल कागजी दावों के जरिए तस्वीर बेहतर दिखाने की कोशिश की जाए।
कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट में गंभीर खामियां
सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर की निरीक्षण रिपोर्ट का भी उल्लेख हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल की छत से पानी टपकने और कई हिस्सों में जलभराव की समस्या सामने आई। फायर फाइटिंग सिस्टम लंबे समय से बंद मिला। अस्पताल की कई बुनियादी सुविधाएं अपेक्षित स्तर पर नहीं थीं।
स्वास्थ्य विभाग ने अदालत को बताया कि 15 जून 2026 को फायर फाइटिंग सिस्टम की मरम्मत के आदेश जारी किए जा चुके हैं और कार्य प्रगति पर है।
31 नई मशीनों की खरीद प्रक्रिया जारी
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) ने भी अदालत में शपथ पत्र दाखिल कर बताया कि CIMS के लिए 31 आधुनिक मशीनों की खरीद प्रक्रिया चल रही है।
- 13 मशीनें अस्पताल पहुंच चुकी हैं।
- 2 मशीनों के लिए खरीद आदेश जारी।
- 2 मशीनों को मंजूरी की प्रक्रिया में रखा गया।
- कई मशीनों की तकनीकी जांच और टेंडर प्रक्रिया जारी है।
हाईकोर्ट की दो टूक टिप्पणी
डिवीजन बेंच ने कहा कि अदालत का उद्देश्य किसी अधिकारी को दंडित करना नहीं, बल्कि CIMS की स्वास्थ्य सेवाओं में वास्तविक सुधार सुनिश्चित करना है। कोर्ट ने कहा कि “जब जरूरतमंद मरीज को समय पर इलाज और मशीनों की सुविधा मिलेगी, तभी वह दिल से दुआ देगा।”
साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट कमिश्नर भविष्य में कभी भी अस्पताल का निरीक्षण कर सरकारी दावों का सत्यापन कर सकते हैं।



