रायपुर। छत्तीसगढ़ में जिला खनिज न्यास (DMF) फंड से जुड़े कथित घोटाले की जांच के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राज्य के पांच अलग-अलग जिलों में एक साथ बड़ी छापेमारी की। रायपुर, दुर्ग, धमतरी, अंबिकापुर और महासमुंद सहित कई स्थानों पर कारोबारियों और ठेकेदारों के ठिकानों पर दबिश दी गई।
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जानकारी के अनुसार, रायपुर के वल्लभ नगर स्थित कारोबारी शाश्वत लुणावत, धमतरी के ठेकेदार दीपेश गांधी, और सरगुजा में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं फर्म मानसून एग्रो के संचालक राकेश गुप्ता के ठिकानों पर ईडी की टीमों ने दस्तावेजों की जांच की।
छापेमारी के दौरान ईडी की टीमों ने संबंधित ठिकानों पर वित्तीय रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा और लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। कई जगहों पर घंटों तक पूछताछ और रिकॉर्ड खंगालने की कार्रवाई जारी रही।
सरगुजा में ईडी की टीम सुबह सुरक्षा बलों के साथ पहुंची और मानसून एग्रो फर्म में दस्तावेजों की जांच शुरू की। अधिकारियों ने सप्लाई रिकॉर्ड, टेंडर दस्तावेज और पिछले वर्षों में किए गए सरकारी सप्लाई के अनुबंधों की जांच की। बताया जा रहा है कि यह जांच पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में हुई सप्लाई और टेंडर आवंटन से भी जुड़ी है।
वहीं धमतरी में कोतवाली थाना क्षेत्र के आमापारा वार्ड स्थित ठेकेदार दीपेश गांधी के निवास पर ईडी ने छापा मारा। टीम ने घर में मौजूद परिजनों से पूछताछ की और मोबाइल फोन सहित कई दस्तावेजों को जांच के लिए कब्जे में लिया। यहां भी वित्तीय लेन-देन और सरकारी परियोजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई।
सूत्रों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई ईडी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की एफआईआर के आधार पर की जा रही है। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 120B और 420 के तहत केस दर्ज किया गया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, DMF कोरबा फंड से जुड़े टेंडरों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और अवैध लाभ पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में कुछ ठेकेदारों और बिचौलियों की मिलीभगत से नियमों के विपरीत कार्य किए गए।
ईडी के प्रारंभिक निष्कर्षों में संजय शिंदे, अशोक कुमार अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, ऋषभ सोनी सहित कुछ ठेकेदारों और मनोज द्विवेदी, रवि शर्मा, पियूष सोनी, पियूष साहू, अब्दुल और शेखर जैसे बिचौलियों की भूमिका का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, अभी तक किसी भी आरोपी या संबंधित पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ईडी की कार्रवाई के बाद पूरे प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
फिलहाल छापेमारी जारी है और जांच एजेंसियां दस्तावेजों व डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले में विस्तृत तथ्य और संभावित कार्रवाई स्पष्ट हो पाएगी।



