लोकेश्वर सिन्हा
गरियाबंद /छत्तीसगढ़. प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य जिले- गरियाबंद के छुरा विकासखण्ड के एक आदिवासी किसान ने क्षेत्र में पदस्थ वन रक्षक और डिप्टी रेंजर पर पद के दुरुपयोग, कथित अवैध वसूली, धमकी और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं।
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स्थानीय और आदिवासी समाज के किसान हरेन्द्र कंवर ने जिले के कलेक्टर और डीएफओ को लिखित शिकायत सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच एवं दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निजी राजस्व भूमि पर कृषि कार्य के दौरान वन विभाग के कर्मचारियों ने कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर 50 हजार रुपये की मांग की।

जिसके बाद 35 हजार रुपये मामले को रफा-दफा और आरोपों से बरी करने के एवज में वसूल लिए। लिखित शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि बाद में इस मामले को दबाने और शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

पीड़ित किसान ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन कर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस पूरे मामले को पूर्व में जनप्रतिनिधियों को भी अवगत कराया गया था।

पंरतु उनकी तरफ से कोई सहायता नहीं मिलने पर लिखित शिकायत कलेक्टर, गरियाबंद और जिले के डीएफओ से की गई है। वहीं इस पूरे मामले में कलेक्टर भगवान सिंह ऊइके ने शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की जांच कराए जाने तथा तथ्य सही पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

अब सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि क्या एक आदिवासी समाज के कलेक्टर अपने ही समाज के साधारण किसान को न्याय दिला पाते हैं या ये लिखित आवेदन सैकड़ों आवेदन में कहीं दब जायेगा और धूल की परतों में खो जायेगा ? या मिलेगा हरेन्द्र कंवर को न्याय और उसके ख़ून-पसीने के मिलेंगे 35 हज़ार जो चढ़ गए भेंट अवैध वसूली के ? क्या होंगे वसूलीबाज बीट गार्ड और डिप्टी रेंजर निलंबित और सलाखों के पीछे ? सवाल बहुत है और जवाब है आदिवासी समाज के कलेक्टर भगवान और वक्त के पास….!



