गरियाबंद : उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व ( Udanti Sitanadi Tiger Reserve ) में बाघ के शिकार की साजिश का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। वन विभाग की एंटी पोचिंग टीम ने ओडिशा के 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी कार्रवाई की है। आरोपियों के पास से जहर, चीतल के सींग, जहरीली मछलियां और केकड़े बरामद किए गए हैं। मामले में कुछ आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है।
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वन विभाग के अनुसार ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के कुछ शिकारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में सक्रिय बाघ का शिकार करने की योजना बना रहे थे। सूचना मिलने पर विभाग ने पांच दिन पहले ही ओडिशा सीमा से लगे पहाड़ी और बीहड़ क्षेत्रों में तीन विशेष चौकियां और कैंप स्थापित कर निगरानी शुरू कर दी थी।
कार्रवाई के दौरान 9 मई को ओडिशा निवासी 76 वर्षीय रमन हेरना को पकड़ा गया। उसके पास से चीतल का सींग बरामद हुआ। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि बाघ की खाल हासिल करने के लिए कुसुमखूंटा गांव के एक व्यक्ति को “कॉन्ट्रैक्ट” दिया गया था। आरोपियों ने बाघ को जहर और तीर-कमान से मारने की योजना बनाई थी।
इसके बाद एंटी पोचिंग टीम ने जांच तेज करते हुए 10 मई को कटफाड़ गांव के छह आरोपियों को रानीबरझोला नाला में जहर डालकर शिकार करते रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी बाघ और हाथियों के विचरण क्षेत्र में पानी को जहरीला कर वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे।
मौके से जहर की शीशी, मृत मछलियां और केकड़े जब्त किए गए। गिरफ्तार आरोपियों में बुधराम पहरिया, अनंतराम पहरिया, मनलाल पहरिया, दिगसन पहरिया, धनु चिड़ा और मधुराम पहरिया शामिल हैं।
सभी आरोपियों को JMFC Court Rajim में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए टाइगर रिजर्व क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। वन विभाग अब थर्मल ड्रोन, बॉर्डर कैंप और लगातार पेट्रोलिंग के जरिए जंगल की निगरानी कर रहा है। वहीं, Raipur की फॉरेंसिक टीम की मदद से जब्त जहर को एफएसएल लैब भेजा जा रहा है।
वन विभाग ने कहा है कि फरार आरोपियों की तलाश जारी है और वन्यजीवों के खिलाफ किसी भी साजिश को सख्ती से कुचला जाएगा। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत आरोपियों को 7 साल तक की सजा हो सकती है।



