रायपुर। गरीब और मध्यम वर्ग की बेटियों के विवाह के लिए चालू की गई मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अब सरकारी पैसे की खुली लूट का अड्डा बन गई है। योजना का पैसा असली जरूरतमंदों तक पहुंचने की बजाय पहले से शादीशुदा जोड़ों को दोबारा सामूहिक विवाह में शामिल कर बांटा जा रहा है। यह साफ तौर पर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार है।
30 जोड़ों वाले सामूहिक विवाह में खुला घोटाला
11 अप्रैल को राजधानी रायपुर के मठपुरैना स्थित शासकीय विद्यालय में 30 जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया गया। इनमें अर्बन-1 से 25 और अर्बन-2 से 5 जोड़े शामिल थे। लेकिन सूत्रों और स्थानीय जांच से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है — अर्बन-2 की 5 जोड़ियों में से कम से कम 2 जोड़ों की शादी पहले ही हो चुकी थी। फिर भी उन्हें योजना में शामिल कर सरकारी लाभ दिया गया।
यानी सरकारी पैसे से दूसरी बार शादी का नाटक रचा गया। यह कोई छोटी अनियमितता नहीं, बल्कि सिस्टेमैटिक घोटाला है।
अर्बन-1 में और बड़ा खेल?
अब अर्बन-1 की 25 जोड़ियों की सूची पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जब हमारी टीम ने अधिकारियों से मूल सूची, दस्तावेज, आय प्रमाण और विवाह प्रमाण-पत्र मांगे तो अधिकारी या तो गायब हो गए या एक-दूसरे का बहाना बनाकर जवाब देने से बचते रहे। कोई दस्तावेज नहीं, कोई स्पष्टीकरण नहीं, कोई कार्रवाई रिपोर्ट नहीं। यह बचाव स्पष्ट संकेत देता है कि पैसों की बंदरबांट पहले ही हो चुकी है और अब सिर्फ कागजी कार्यवाही का ढोंग रचा जा रहा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग पर गंभीर आरोप
- योजना का पैसा आखिर कहां जा रहा है?
- पहले से शादीशुदा जोड़ों को लाभ दिलाने में कौन-कौन से अफसर और दलाल सक्रिय हैं?
- क्या पूरे विभाग में सांठगांठ का नेटवर्क चल रहा है?
- पूर्व में भी इसी विभाग में साड़ी घोटाला समेत कई बड़े अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं। फिर भी मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी चुप क्यों हैं?
- विभाग को जानबूझकर लूट का अड्डा बना दिया गया है?
गरीबों की बेटियों के हक की लूट
जब मध्यम वर्ग और गरीब परिवार अपनी बेटियों की शादी के लिए कर्ज ले रहे हैं, महंगे खर्च उठा रहे हैं, तब सरकारी योजना का पैसा पहले से ब्याहे जा चुके जोड़ों के खातों में जा रहा है। यह सिर्फ योजना की हत्या नहीं, बल्कि गरीब बेटियों के हक की सीधी लूट है।
सवाल उठता है –
क्या छत्तीसगढ़ सरकार इस घोटाले की जांच कराएगी या फिर इस बार भी फाइलें दबा दी जाएंगी?



