Mahabharat Story : महाभारत में गांधारी के 100 पुत्रों की माता बनने की कथा बेहद रोचक और रहस्यमयी मानी जाती है। जब हस्तिनापुर में धृतराष्ट्र और पांडु के विवाह के बाद वंश वृद्धि की उम्मीदें बढ़ीं, उसी समय गांधारी को सौ पुत्रों का वरदान प्राप्त हुआ।
यह भी पढ़े :- Trump Tariff: ट्रंप के 25% टैरिफ से तिलमिलाया यूरोप, व्यापार युद्ध की नई जंग शुरू
कथा के अनुसार, गांधारी भगवान शिव की परम भक्त थीं। उनकी कठोर तपस्या और भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें 100 पुत्रों की माता बनने का वरदान दिया था। (Mahabharat Story)
इसके बाद एक दिन महर्षि वेदव्यास धृतराष्ट्र के महल पहुंचे। उस समय गांधारी ने आंखों पर पट्टी बंधी होने के बावजूद महर्षि वेदव्यास का आदर-सत्कार किया। उन्होंने उन्हें आसन दिया, भोजन कराया और पूरी श्रद्धा से सेवा की।
गांधारी की सेवा से प्रसन्न होकर महर्षि वेदव्यास ने उन्हें वर मांगने को कहा। तब गांधारी ने अपने पति धृतराष्ट्र के समान 100 पुत्रों की माता बनने का वर मांगा। महर्षि वेदव्यास ने उन्हें आशीर्वाद दिया।
इसके बाद गांधारी गर्भवती हुईं और समय आने पर उन्हें 100 पुत्र तथा एक पुत्री प्राप्त हुई। उनके ज्येष्ठ पुत्र दुर्योधन थे, जो आगे चलकर महाभारत युद्ध के प्रमुख पात्र बने।
यह कथा महाभारत में गांधारी की तपस्या, सेवा भाव और वरदान की महिमा को दर्शाती है। (Mahabharat Story)



