बलौदाबाजार। जिले सहित प्रदेशभर में भीषण गर्मी का असर अब जंगलों और वन्यजीवों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। जहां कभी घने जंगलों में नदी-नाले और प्राकृतिक जलस्रोत भरे रहते थे, वहीं पिछले कुछ वर्षों से कई जलस्रोत सूखने लगे हैं।
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स्थिति यह है कि जल की तलाश में वन्यजीवों को अब जंगलों से बाहर निकलने पर मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे हालात में प्रसिद्ध बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर विशेष और संवेदनशील पहल की है।
वन विभाग द्वारा जंगल के भीतर स्थित नालों की सफाई कर उन्हें पुनर्जीवित करने का काम किया जा रहा है। साथ ही जगह-जगह बने कृत्रिम जलस्रोतों और सीमेंट के वॉटरहोल में टैंकरों के माध्यम से नियमित रूप से पानी भरा जा रहा है, ताकि वन्यजीवों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
अभयारण्य क्षेत्र में 240 से अधिक जलस्रोतों—जैसे तालाब, स्टॉप डैम, वॉटरहोल आदि—को चिन्हित कर उनकी नियमित निगरानी की जा रही है। वन विभाग हर 15 दिनों में जलस्तर का आकलन कर यह सुनिश्चित कर रहा है कि प्रत्येक 5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पानी उपलब्ध रहे।
इसके अलावा 25 से 30 संवेदनशील स्थानों पर टैंकरों के जरिए जलापूर्ति की जा रही है। जल की गुणवत्ता की भी नियमित जांच की जा रही है, जिसमें पीएच और टीडीएस जैसे मानकों का परीक्षण शामिल है, ताकि पानी वन्यजीवों के लिए सुरक्षित रहे।
वन्यजीवों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जलस्रोतों के आसपास साल्ट लिक की भी व्यवस्था की गई है, जिससे उन्हें आवश्यक खनिज तत्व भी मिल सकें।
वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि यह पहल न केवल वर्तमान गर्मी में राहत देने वाली है, बल्कि भविष्य में जल प्रबंधन के लिए एक प्रभावी मॉडल के रूप में भी काम करेगी।




