रायपुर। राजधानी रायपुर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आज के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) में नर्सरी कक्षा को शामिल करने की मांग उठाई और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
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प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मनमोहन सिंह की सरकार के समय से ही RTE कानून में नर्सरी को शामिल किया गया था, लेकिन वर्तमान में छत्तीसगढ़ सरकार बच्चों के प्रवेश में बाधा उत्पन्न कर रही है।
निजी स्कूलों के फैसले से बढ़ा विवाद
इधर, निजी स्कूल संचालकों के संगठन प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाने पर RTE के तहत प्रवेश नहीं देने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद प्रदेश में विवाद और गहराता नजर आ रहा है।
सरकार का सख्त रुख
छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निजी स्कूल RTE के तहत बच्चों को प्रवेश नहीं देंगे तो उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है। सरकार के इस सख्त रुख के बाद शिक्षा क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है।
25% आरक्षण का प्रावधान
प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त निजी विद्यालयों में RTE के तहत प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिया जाता है।
कांग्रेस का दावा है कि उनके शासनकाल में अधिक संख्या में बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश मिल पाता था, जबकि वर्तमान व्यवस्था में केवल 25% सीटों तक ही सीमित कर दिया गया है, जिससे कई बच्चों के प्रवेश पर असर पड़ रहा है।
शुल्क प्रतिपूर्ति की वर्तमान दरें
कक्षा 1 से 5 तक: ₹7,000 प्रति वर्ष
कक्षा 6 से 8 तक: ₹11,400 प्रति वर्ष
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि RTE में नर्सरी कक्षा को शामिल नहीं किया गया और बच्चों के प्रवेश में आ रही बाधाओं को दूर नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



